न हुई सुबह न कभी रात इस दिल ए शहर में

 

न  हुई  सुबह  न  कभी  रात इस दिल ए शहर में

कितने   ही   सूरज   उगे   कितने   ही  ढलते  रहे


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2 Comments

  1. Anirudh sethi - March 3, 2016, 6:55 pm

    kya baat he

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