इन परों में वो आसमान, मैं कहॉ से लाऊं इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं   (कफ़स  = cage) हो गये पेड सूने इस पतझड के शागिर्द में अब इन पर नये […]

जिंदगी खेलती है खेल हर लम्हा मेरे साथ नहीं जानती गुजर गया बचपन इक अरसा पहले खेल के शोकीन इस दिल को घेर रखा है अब उधेड़ बुनों ने कसकर अब इनसे निकलूं तो खेलूं […]

कर रहे थे बसर जिंदगी गुमनाम गलियों में आपकी मोहब्बत ने हमें मशहूर कर दिया पुकारने लगे लोग हमें कई नामों से हमें यूं बदनाम होना भी अच्छा लगा आपका तस्व्वुर हमारे ज़हन में गुंजता […]

बिना कलम मैं कौन क्या परिचय मेरा कहां का रहवासी मैं शायद कविता लिखने वाला कवि था मैं पर अब मै कौन बिना कलम मैं कौन   कलम के सहारे नन्ही नन्ही लकीरों से रचता […]

इसे बेनाम ही रहने दो, कोई नाम न दो वर्ना बेवजह दिल में कई सवाल उठेंगें उन सवालों का जबाव हमारे पास नहीं सिर्फ़ अहसास है हमारे पास, जो लफ़्जों में ढलते ही नहीं लफ्जों […]

पछताओगे तुम, रुसवाईयां करोगे गर छोड दिया हमने तेरी गलियों मे आना कभी   तुझसे मुश्ते-मोहब्बत मांगी थी, कोई कोहिनूर नहीं बस तेरे दीदार की दरकार थी चश्मेतर को कभी   भर गये पांव आबलो […]

Saavan  ये कारवां चले तो, हम भी चलेंये शम्मा जले तो, हम भी जलेंखाक करके हर पुरानी ख्वाहिश कोइक नया कदम, हम भी चलें……   कभी ठहरी सी लगती है,कभी बहती चली जाती हैजिंदगी है […]

आज की शाम शमा से बाते कर लूंउससे चेहरे को अपनी आखों में भर लूं फासले है क्यों उसके मेरे दरम्याचलकर कुछ कदम कम ये फासले कर लूं प्यार करना उनसे मेरी भूल थी अगरतो […]

कुछ कमाल की बात है उनकी आवाज में कभी कोयल सी मधुर लगती है कभी बिजली की कडक सी कर्कश तो कभी बूंद बनकर बरसती है मेरे सूखे पडे ह्रदय में कभी बहा कर ले जाती […]

हम अपना हाल -ए- दिल आपसे कहते रहेकभी बच्चा तो कभी मासूम आप हमें कहते रहे आज तक कोई सबक पढा न जिंदगी में हमनेताउम्र हम आपकी आखों जाने क्या पढते रहे इक अरसा बीत […]

सिमट रहा हूं धीरे धीरे इन सर्द रातों में छिपा रहा हूं खुद को खुद में इस बेनूर अंधेरे में कभी कोई चीख सुनाई देती है खामोश सी, कभी सर्द हवाओं को चीरती पत्तों की […]

चली आतीं है अक्सर यादें तुम्हारी मगर तुम नहीं आते की कोशिश कई दफ़ा भूल जाने की तुम्हे मगर भूल नहीं पाते   आयीं राते पूनम की कई बार मगर न हुआ चांद का दीदार […]

धुंधले–धुंधले कोहरे में छिपती रवि से दूर भागती एक‘रश्मि’ अचानक टकरा गयी मुझसे आलोक फैल गया भव में ऐसे उग गये हो सैकडो रवि नभ मे जैसे सतरंगी रश्मियों से नभ सतरंगा सा हो गया […]

घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरेआईने पर भी अब मुझे न एतबार रहा हमारी मोहब्बत का असर हुआ उन पर इस कदरनिखर गयी ताबिश1-ए-हिना, न वो रंग ए रुख़्सार रहा हमारी […]

जो आँख देख ले उसे वो वहीं ठहर जाती हैदेखते देखते उसे शाम ओ सहर बीत जाती है फ़लक से चाँद भी उसे देखता रहता है रातभरउसकी रूह चाँदनी ए नूर में खिलखिलाती है महकते […]

उसके चेहरे से नजर हे कि हटती नहींवो जो मिल जाये अगर चहकती कहीं जिन्दगी मायूस थी आज वो महका गयीजेसे गुलशन में कोई कली खिलती कहीं वो जो हंसी जब नजरे मेरी बहकने लगीमन […]

आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहेएक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे आप हमारी हकीकत तो बन न सकेख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहे आप से ही चैन ओ […]

कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है वो न आये तो सताती है ख़लिश सी दिल को वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है (ख़लिश = चुभन, […]

जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है बात इतनी है कि लिबास मेरे रूह से अनजान है­­ तारीकी है मगर, दिया भी नहीं जला सकते है क्या करे घर में सब लाक के सामान है ऐसा […]