Tag: poetry with panna

  • मिलना न हुआ

    कितनी मिन्नतों के बाद में मिला तुझसे
    मगर मिलकर भी मेरा मिलना न हुआ

    क़ी कई बातें, कई मर्तबा हमने
    मगर इक बात पे कभी फैसला ना हुआ

  • बात से बात चले

    गुफ़्तगु बंद न हो, बात से बात चले
    मैं तेरे साथ चलूं, तू मेरे साथ चले|

  • दास्ता ए जिंदगी

    चंद पन्नों में सिमट गयी दास्ता ए जिंदगी
    अब लिखने को बस लहू है, और कुछ नहीं|

  • इक रब्त

    इक रब्त था जो कभी रहता था दरम्या हमारे
    किस वक्त रूखसत हुआ, खबर नहीं|

  • कफ़स

    कफ़स

    इन परों में वो आसमान, मैं कहॉ से लाऊं
    इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं   (कफ़स  = cage)

    हो गये पेड सूने इस पतझड के शागिर्द में
    अब इन पर नये पत्ते, मैं कहॉ से लाऊं

    जले हुए गांव में अब बन गये है नये घर
    अब इन घरों में रखने को नये लोग, मैं कहॉ से लाऊं

    बुझी-बुझी है जिंदगी, बुझे-बुझे से है जज्बात यहॉ
    इस बुझी हुई राख में चिन्गारियॉ, मैं कहॉ से लाऊं

    पथरा गयी है मेरे ख्यालों की दुनिया
    अब इस दुनिया में मुस्कान, मैं कहॉ से लाऊ

    sign

  • खेल

    खेल

    जिंदगी खेलती है खेल
    हर लम्हा मेरे साथ
    नहीं जानती गुजर गया बचपन
    इक अरसा पहले
    खेल के शोकीन इस दिल को
    घेर रखा है अब
    उधेड़ बुनों ने कसकर
    अब इनसे निकलूं तो खेलूं
    कोई नया खेल जिंदगी के साथ|

  • अगर तुम न मिलते

    जिंदगी का कारवां यूं ही गुजर जाता अगर तुम न मिलते
    हमारे लफ़्जों में कहां कविता उतरती अगर तुम न मिलते

  • न हुई सुबह न कभी रात इस दिल ए शहर में

     

    न  हुई  सुबह  न  कभी  रात इस दिल ए शहर में

    कितने   ही   सूरज   उगे   कितने   ही  ढलते  रहे

  • हमें यूं बदनाम होना भी अच्छा लगा

    कर रहे थे बसर जिंदगी गुमनाम गलियों में

    आपकी मोहब्बत ने हमें मशहूर कर दिया

    पुकारने लगे लोग हमें कई नामों से

    हमें यूं बदनाम होना भी अच्छा लगा

    आपका तस्व्वुर हमारे ज़हन में गुंजता रहता है

    ज़हन से उसे जुबां पर लाने का हौसला नहीं

    आपकी यादो ने जो हमें गाने को जो किया मजबूर

    हमें यूं बेसूरा गाना भी अच्छा लगा

    आपका अहसास ही तो हमारी जिंदगी है

    बिना आपके जिंदगी का क्या मायना है

    दो पल शम्मा से गुफ़्तगु करने की खातिर

    परवाने को यूं जलना भी अच्छा लगा

    दिल ए आईने में एक तस्वीर थी आपकी

    तोड दिया वो आईना आपने बडी बेर्ददी से

    मगर अब बसी हो आप हर बिखरे हूए टुकडे में

    हमें यूं टूट कर बिखर जाना भी अच्छा लगा

  • बिना कलम मैं कौन ?

    बिना कलम मैं कौन ?

    बिना कलम मैं कौन

    क्या परिचय मेरा

    कहां का रहवासी मैं

    शायद कविता लिखने वाला

    कवि था मैं

    पर अब मै कौन

    बिना कलम मैं कौन

     

    कलम के सहारे

    नन्ही नन्ही लकीरों से

    रचता मैं इन्द्रजाल

    सजते शब्द शर स्वतः

    और कर देते हताहत

    क्ष्रोता तन को

    लेकिन अब रूठ गयी कलम मुझसे

    नष्ट हो गए सारे शर

    रिक्त हो गया मेरा तूणीर

    विलीन हो गया रचित इन्द्रजाल

    और मैं हो गया मायूस मौन

    बिना कलम मैं कौन

  • Ise Benaam hee Rahne Do

    Ise Benaam hee Rahne Do

    इसे बेनाम ही रहने दो, कोई नाम न दो

    वर्ना बेवजह दिल में कई सवाल उठेंगें

    उन सवालों का जबाव हमारे पास नहीं

    सिर्फ़ अहसास है हमारे पास,

    जो लफ़्जों में ढलते ही नहीं

    लफ्जों के सहारे दिल कुछ हल्का कर लेते है

    गमों के घूंट, एक-दो पी लेते है

    वर्ना इस दुनिया मे रखा ही क्या है

    कुछ रखने को आखिर, बचा ही क्या है

    इन अश्कों को ही आंखो में बचा के रखा है

    कभी तुम मिल जाओगे इन्हे भी खर्च देंगें हम

    मिल जाओ तुम अगर, लुट जाऐगें हम

    मगर शायद लुट जाना हमारी किस्मत में नहीं

    चंद कदमों का फ़ासला है, मगर पांव चलते ही नहीं

    कई कारवां इसी फासले से गुजर जाऐगें

    हम तो है यहीं, यहीं रह जाऐगें

    बस अहसास हमारे, शायद तुम तक पहुंच जाऐगें

    इन अहसासों के फासलों को अब मिट जाने दो

    इसे बेनाम ही रहने दो, कोई नाम न दो

  • पछताओगे तुम, रुसवाईयां करोगे

    पछताओगे तुम, रुसवाईयां करोगे

    गर छोड दिया हमने तेरी गलियों मे आना कभी

     

    तुझसे मुश्ते-मोहब्बत मांगी थी, कोई कोहिनूर नहीं

    बस तेरे दीदार की दरकार थी चश्मेतर को कभी

     

    भर गये पांव आबलो से पुखरारों पर चलकर

    सारे घाव भर जाते ग़र मलहम लगा देते कभी

     

    यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

    चले गये जो इकबार, फिर ना आयेंगे कभी

     

    घुल जाये तेरी रोशनी में रंगे-रूह मेरी

    ग़र जल जाये मेरी महफिल में शम्मा ए इश्क कभी

  • Few words from Mushaira

    Few words from Mushaira

    Saavan 

    ये कारवां चले तो, हम भी चलें
    ये शम्मा जले तो, हम भी जलें
    खाक करके हर पुरानी ख्वाहिश को
    इक नया कदम, हम भी चलें……


     

    कभी ठहरी सी लगती है,
    कभी बहती चली जाती है
    जिंदगी है या पानी है
    न जाने क्यों जम जाती है


    कोई वक्त था, जब एक रब्त चला करता था हमारे दरम्या
    गुजर गया वो रब्त, अब साथ बस वक्त चले


    मुश्किल है राहें, सूनी है अकेली सी
    इस अकेलेपन में साथ तन्हाई चले


     

     

  • आज की शाम

    आज की शाम

    आज की शाम शमा से बाते कर लूं
    उससे चेहरे को अपनी आखों में भर लूं

    फासले है क्यों उसके मेरे दरम्या
    चलकर कुछ कदम कम ये फासले कर लूं

    प्यार करना उनसे मेरी भूल थी अगर
    तो ये भूल एक बार फिर से कर लूं

    उसके संग चला था जिंदगी की राहों में
    बिना उसके जिंदगी कैसे बसर कर लूं

    परवाने को जलते देखा तो ख्याल आया
    आज की शाम शमा से बाते कर लूं

    sign

  • समंदर में इक कश्ती है छोटी सी

    समंदर में इक कश्ती है छोटी सी

    समंदर में इक कश्ती है छोटी सी

    कभी रोती थी रेत के दरिया में

    अब दरिया अश्क में तैरती है..

  • कुछ कमाल की बात है

    कुछ कमाल की बात है

    कुछ कमाल की बात है

    उनकी आवाज में

    कभी कोयल सी मधुर लगती है

    कभी बिजली की कडक सी कर्कश

    तो कभी बूंद बनकर बरसती है

    मेरे सूखे पडे ह्रदय में

    कभी बहा कर ले जाती है

    डुबा देती है

    समंदर के आगाज़ में

    कुछ कमाल की बात है

    उनकी आवाज में

  • झुकी जो नजर

    झुकी जो नजर

    थोडा सा शरमाकर, हल्के से मुस्कुराकर झुकी जो नजर
    नज़रे-नूर-ओ-रोशनी में मेरी रंगे-रूह हल्के से घुलती गयी

    sign

  • हाल -ए- दिल

    हाल -ए- दिल

    हम अपना हाल -ए- दिल आपसे कहते रहे
    कभी बच्चा तो कभी मासूम आप हमें कहते रहे

    आज तक कोई सबक पढा न जिंदगी में हमने
    ताउम्र हम आपकी आखों जाने क्या पढते रहे

    इक अरसा बीत गया हम मिले नहीं आपसे
    तुझसे मुलाकात के इंतजार में हम तनहा मरते रहे

    न हुई सुबह न कभी रात इस दिल ए शहर में
    कितने ही सूरज उगे कितने ही ढलते रहे

    अनजान राहों में चलते रहे मंजिल की तलाश में
    चलना ही मुसाफिर का नसीब है सो हम चलते रहे

    sign

  • कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

    कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

    कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

    उमडने को आतुर है ज़ज्बात मिरे

    वो तो अल्फ़ाज़ हैं कि कहीं खोये हुए है

    नहीं तो इक नज़्म लिख देते अश्क मिरे

  • डर

    डर

    सिमट रहा हूं धीरे धीरे

    इन सर्द रातों में

    छिपा रहा हूं खुद को खुद में

    इस बेनूर अंधेरे में

    कभी कोई चीख सुनाई देती है

    खामोश सी,

    कभी सर्द हवाओं को चीरती पत्तों की सरसराहट,

    तो कभी कहीं दूर भागती गाडी की आवाज

    कभी कभी गिर पडते हैं

    ठण्डेठण्डे रूखसारों पर गर्म आंसू,

    कभी चल उठती है

    यादों की लपटें सर्द हवाओं के बीच,

    कभी डर उठता हूं पास आती अनजान आहटों से

    देखता हूं बार बार बाहर बंद खिडकी से झांककर

    कहीं कोई बाहर तो नहीं?

    नहीं, कोई नहीं बस डर है

    शायद अजीब सा

    समझ नहीं आता कैसा

    किसी के साथ होने का डर या,

    किसी साथ जाने का ?

  • काश तुम चले आते!

    काश तुम चले आते!

    चली आतीं है अक्सर यादें तुम्हारी

    मगर तुम नहीं आते

    की कोशिश कई दफ़ा भूल जाने की तुम्हे

    मगर भूल नहीं पाते

     

    आयीं राते पूनम की कई बार

    मगर हुआ चांद का दीदार

    कर दिया है हमने अंधेरा अपने आशियाने में

    हम उजाला अब सह नहीं पाते

    काश तुम चले आते |

  • एक अरसे से

    एक अरसे से उनसे नजर नहीं मिली

    जमाना गुजर गया किसी को देखे हुए

     

  • रश्मि

    रश्मि

    धुंधलेधुंधले कोहरे में छिपती

    रवि से दूर भागती

    एकरश्मि

    अचानक टकरा गयी मुझसे

    आलोक फैल गया भव में ऐसे

    उग गये हो सैकडो रवि नभ मे जैसे

    सतरंगी रश्मियों से

    नभ सतरंगा सा हो गया

    सैकडो इन्द्रधनुष फैल गये नभ में

    पलभर में कोहरा कहीं विलीन हो गया

    विलीन हो गयी वोरश्मिभी

    रवि के फैले आलोक में 

    ढूंढ रहा हूं तब से में

    उसरश्मिको

    जो खो गयी दिन के उजाले में

    जाने कहां गुम हो गयी

    मेरी वोरश्मि

  • घुल गया उनका अक्स

    घुल गया उनका अक्स

    घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरे
    आईने पर भी अब मुझे न एतबार रहा

    हमारी मोहब्बत का असर हुआ उन पर इस कदर
    निखर गयी ताबिश1-ए-हिना, न वो रंग ए रुख़्सार रहा

    हमारी मोहब्बत पर दिखाए मौसम ने ऐसे तेवर
    न वो बहार-ए-बारिश रही, न वो गुल-ए-गुलजार रहा

    भरी बज्म2 में हमने अपना दिल नीलाम कर दिया
    किस्मत थी हमारी कि वहां न कोई खरीददार रहा

    तनहाईयों में अब जीने को जी नहीं करता
    दिल को खामोश धडकनों के रूकने का इंतजार रहा

    sign

    1. ताबिश : चमक
    2. बज़्म= सभा

  • जो आँख देख ले उसे

    जो आँख देख ले उसे वो वहीं ठहर जाती है
    देखते देखते उसे शाम ओ सहर बीत जाती है

    फ़लक से चाँद भी उसे देखता रहता है रातभर
    उसकी रूह चाँदनी ए नूर में खिलखिलाती है

    महकते फूल भी उससे आजकल जलते है
    तसव्वुर से उसके फिजा सारी महक जाती है

    मदहोश हो जाता है मोसम लहराए जो आचॅल उसका
    जुल्फें जो खोल दे वो तो घटाऍ बरस जाती है

    तनहाइयों में जब सोचता हूं उनको
    शब्द ओ शायरी खुद ब खुद सज जाती है

    sign

  • शागिर्द ए शाम

    जब शागिर्द ए शाम तुम हो तो खल्क का ख्याल क्या करें
    जुस्तजु ही नहीं किसी जबाब की तो सवाल क्या करें

    sign

  • उसके चेहरे से …

    उसके चेहरे से …

    उसके चेहरे से नजर हे कि हटती नहीं
    वो जो मिल जाये अगर चहकती कहीं

    जिन्दगी मायूस थी आज वो महका गयी
    जेसे गुलशन में कोई कली खिलती कहीं

    वो जो हंसी जब नजरे मेरी बहकने लगी
    मन की मोम आज क्यों पिगलती गयी

    महकने लगा समां चांदनी खिलने लगी
    छुपने लगा चाँद क्यों आज अम्बर में कहीं

    भूल निगाओं की जो आज उनसे टकरा गयी
    वो बारिस बनकर मुझ पे बरसती गयी

    कुछ बोलना ना चाहते थे मगर ये दिल बोल उठा
    धीरे- धीरे मधुमयी महफिल जमती गयी

    आँखों का नूर करता मजबूर मेरी निगाहों को
    दिल के दर्पण पर उसकी तस्वीर बनती गयी

    सदियों से बंद किये बेठे थे इस दिल को
    मगर चुपके से वो इस दिल में उतरती गयी

    तिल तिल जलता हे दिल मगर धुआं हे कि उठती नहीं
    परवाना बनकर बेठे हे शमां हे की जलती नहीं

    हो गयी क़यामत वो जो सामने आ गयी
    दर्द ऐ दिल से गजल आज क्यों निकलती गयी

    थोडा सा शरमाकर, हल्के से मुस्कुराकर झुकी जो नजर
    नज़रे-नूर-ओ-रोशनी में मेरी रंगे-रूह हल्के से घुलती गयी

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    https://poetrywithpanna.wordpress.com/

  • एक मुलाकात की तमन्ना मे

    आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहे
    एक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे

    आप हमारी हकीकत तो बन न सके
    ख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहे

    आप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल का
    बिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहे

    सावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के मौसम में
    हम आपको याद करते रहे और बादल बरसते रहे

    जब देखा पीछे मुडकर हमने आपकी आस में
    एक सूना रास्ता पाया, जिस पर तनहा हम चलते रहे

    sign

  • यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

    यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

    यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

    चले गये जो इकबार, फिर ना आयेंगे कभी

  • कौन कहता है

    कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है
    ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है

    वो न आये तो सताती है ख़लिश सी दिल को
    वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है

    (ख़लिश = चुभन, वेदना)

    रूह को शाद करे, दिल को जो पुरनूर करे
    हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है

    (शाद = प्रसन्न), (पुरनूर = प्रकाशमान, ज्योतिर्मय), (तनवीर = रौशनी, प्रकाश)

    ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोकें
    दिल में जो बात हो आँखों से अयाँ होती है

    (ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत = मुहब्बत की बाढ़ की सहनशीलता), (अयाँ = साफ़ दिखाई पड़ने वाला, स्पष्ट, ज़ाहिर)

    ज़िन्दग़ी एक सुलगती-सी चिता है ‘साहिर’
    शोला बनती है न ये बुझ के धुआँ होती है

    -साहिर होशियारपुरी

  • जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है

    जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है

    जिंदगी मेरी जिंदगी से परेशान है
    बात इतनी है कि लिबास मेरे रूह से अनजान है­­

    तारीकी है मगर, दिया भी नहीं जला सकते है
    क्या करे घर में सब लाक के सामान है

    ऐसा नहीं कि कोई नहीं जहान में हमारा यहां
    दोस्त है कई मगर, क्या करें नादान है

    कोई कुछ जानता नहीं, समझता नहीं कोई यहां
    जो लोग करीब है मेरे, दूरियों से अनजान है

    घर छोड बैठ गये हैं मैखाने में आकर
    कुछ नहीं तो मय के मिलने का इमकान है

    ढूढ रहा हूं खुद को, कहीं कभी मिलता नहीं
    चेहरे की तो नहीं, मुझे उसके दिल की पहचान है

    गुजर जायेगी जिंदगी अब जिंदगी से क्या डरना
    जो अब बस पल दो पल की मेहमान है

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