पतन

फांसी, एनकाउन्टर जैसी किसी भी सजा का
नौनिहालो को न रहा है अब डर
जब हो गया हो पतन नैतिक मूल्यों का
फिर कैसे हो आदर्शों का असर।

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

नारी वर्णन

मयखाने में साक़ी जैसी दीपक में बाती जैसी नयनो में फैले काजल सी बगिया में अमराई जैसी बरगद की शीतल छाया-सी बसन्त शोभित सुरभी जैसी…

Responses

  1. कविता तो अच्छी है पर आपने यह कविता 12 अगस्त को भी डाली थी आज दोबारा पोस्ट कर रही हैं
    क्यों?
    प्राणदायिनी नारी कविता तथा हमारी संवेदना उसको भी आपने अलग अलग डेट में पोस्ट की थीं आप ऐसा किस कारण करती हैं?

New Report

Close