प्यार अंधा होता है (Love Is Blind)( Last Part)

दूसरी ओर आरती और गीता दोनो को एक-दूसरे के साथ वक़्त बिताना बहुत ही ज्यादा अच्छा लगने लगा था। जिस दिन गीता आपने ऑफिस जाती थी उस दिन आरती का पूरे दिन बैचैन रहता और किसी काम में जी नहीं लगता था। वो दोनों एक दूसरे को काफी हद तक पसन्द करते थे। उन दिनों आरती गीता को ऑफिस बाले नंबर से कॉल करके बात कर लेती थी इसलिए जो वक़्त कमरे में काट लिया करते थे वो बेहद ही खास हुआ करते थे। आरती गीता का बहुत ख्याल और बहुत ज्यादा ध्यान रखती थी, समय से खाना पीना यहाँ तक उसकी बेटी का भी और गीता के बीमार पड़ने पे भी हद से ज्यादा ख्याल रखना। उन दोनों को देख कर ऐसा लगता था वो दोनों बहनें है। नफ़ीजा उन दोनों की खुशियों में जहर घोलने में देर नहीं करती थी। हमेशा रंग में भंग डालने आ जाती थी। गीता और आरती जानते थे की नफ़ीज़ा हम दोनों की दोस्ती से जलती है तब इन दोनों ने एक नया तरीका निकाला कि हम नफ़ीज़ा के सामने बात नहीं करेंगे। फिर भी नफ़ीज़ा अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही थी।
उस फ्लैट (Apartment) में हर रोज एक नई बात सुनकर मिलती थी। इन दोनों (गीता और आरती) की जिंदगी मानो बेरंग हो गई थी।
गीता का मन भी रूम में आने को नहीं करता था। पर गीता भी क्या कर सकती थी गीता भी मजबूरी थी। गीता भी एक नन्ही सी बेटी (18 महीने) को जो देखभाल करने वाली (Care Taker) महिला के पास छोड़ आती थी। नफ़ीज़ा खान डबल – गेम (Double games) खेल रही थी। उसको ये लगता था गीता और आरती पागल के साथ-2 मुर्ख है। नफ़ीज़ा ये नहीं पता है। वो खुद कितनी मूर्ख है। गीता और आरती को उसकी हरकतों और सारी घटिया योजनाओं के बारे में पता चल गया है। पर वो दोनों गीता और आरती नफ़ीज़ा के सामने दिखावा कर रही थी कि मानो हमें कुछ पता नहीं है। नफ़ीज़ा जो देखभाल करने वाली (Care Taker) महिला को भी अपनी इस घटिया योजना में घसीट मतलब शामिल कर रही थी। पर नफ़ीज़ा खुद को उभारने करने के लिए इतना नीचे कैसे गिर सकती है। उसकी हरकतें और चाल-चलन कैसा है। ये सब को पता था पर कोई उसके मुंह पे नहीं बोलना चाहता था। वे दोनों गीता और आरती खाली समय पर अपनी बेटी या फिर अपनी ही दुनिया में ही मग्न रहती थी एक दिन की बात थी नफ़ीज़ा खान संध्या के समय गीता के कमरे आई वही पे दोनों आरती और जफर भी पहले से मौजूद थे।
गीता और आरती म्यूजिक स्पीकर ब्लूटूथ (Music Speaker Bluetooth) पे पहाड़ी गीत लगाये अपनी बेटियों के साथ नाच रही थी। फिर उस दौरान नफ़ीज़ा फटाफट अपने मोबाइल फ़ोन निकला और तस्वीरें, वीडियो बनाने ही वाली थी, तो एक दम जफर उधर से जोर-2 से चीख पडा और नफ़ीज़ा को अपनी भाषा में ना जाने क्या-क्या बोल दिया। फिर नफ़ीज़ा चुप-चाप सुनती रही और बिना कुछ कहे वहां से चली गई। जिस पर दोनों के बीच आरती की अपने पति जफर खान कहासुनी हो गई। ये सब सुनकर गीता ने आपति जताई और कारण पूछने लगी क्यों नफ़ीज़ा को तस्वीरें खींचने, वीडियो बनाने से रोका. और आरती ने भी जफर से कहा ये तुम्हारी गलती है, क्यों इतने गुस्से से नफ़ीज़ा पर चिलाये सुनो तुम अगली सुबह नफ़ीज़ा दीदी से माफ़ी मांगना गुस्से से आरती ने अपने पति जफर को बोला।
जैसे-2 दिन निकलते गए। नफ़ीज़ा अपनी हरकतों से पीछे नहीं हट रही। कभी जफर के के माता- पिता को फ़ोन करके उनके कान भर रही थी तो कभी आरती को जफर के बारे में, गीता के बारे, तो कभी गीता के पास आरती और जफर के बारे में कान भर रही थी यानि अपने मन से झूठ की बातें बनाने के अलावा उसके पास कोई काम नहीं था। गीता और आरती इन बातों सब को नजरअंदाज कर रही थी। रविवार के दिन गीता की भी छुट्टी थी। आरती और गीता ने भी जल्दी से अपना-अपना काम ख़त्म किया और दोनों सहेली बात करना शुरू कर दी बातों ही बातों पे साडी पहनने का विचार कहां से आ गया। आरती ने गीता से बोला मैंने कभी साड़ी नहीं पहनी है मुझे पहना दो प्लीज गीता ने बोला ठीक है। पता नहीं नफ़ीज़ा कहा से टपक पड़ी। गीता और आरती दोनों ने धीरे से एक दूसरे के साथ बोला आ गई रंग में भंग डालने मुँह में गुनगुनाते हुऐ बोला। नफ़ीज़ा मन ही मन जल कर राख हो रही थी क्योंकि हम दोनों खुशी में झूम रहे थे। 2/3 मिनट के बाद वो वहां से निकल गई। आरती ने साडी पहन ही ली थी। दूसरी ओर नफीसा ने अपनी सासु-माँ (Mother in low) के कान भर दिये। नफ़ीज़ा की सासु-माँ में एक बुराई है, वो थोड़ा कान की कच्ची है। जल्दी ही अपनी बहू की बात आ गई। और जोर-जोर से चिल्लाने लगी उसके चिल्लाने की आवाज आरती के कमरे के अंदर आ रही थी और नफ़ीज़ा की सासु-माँ ने देखा कि आरती और गीता दरवाजा बंद है। पता नी दोनों अन्दर क्या कर रही है। फिर नफ़ीज़ा की सास ने अपनी बहू को वही डांटना शुरू कर दिया। उस समय नफ़ीज़ा की सास गुस्सैल रूप देखने को मिला और ना जाने कितने अपशब्दों (abusive/abuse language) की बारिश कर दी। ये सुन कर आरती के पति ज़फर खान ने भी कुछ नहीं बोला, वो चुप-चाप कैसे सुन रहा था। पर अफसोस इस ही बात का था। 2 मिनट के अन्दर ही गीता के मन में भी हजारों प्रश्नों ने जन्म ले लिया था। आखिरकार क्या बुराई है साड़ी पहने लेती तो वैसे भी वो कौन होती है हमें ऐसा बोलने वाली चाहे कमरा बंद करे या फिर ना, नाना प्रकार से सवाल गीता भी अपने मन से ही पूछे जा रही थी।
आरती की आँखों से भी अश्को की धारा रुकने का नाम नहीं ले रही थी। जब आरती शांत हुई वो नफ़ीज़ा की सासू माँ और ससुर(Father in low) से पूछा एन्टी जी और अंकल जी (Anti ji & Uncle ji) अगर आपको कोई गिला शिकवा था तो ऊपर बुलाकर बोल देते, ऐसे अपशब्द क्यों बोले, अंकल जी ने हाथ जोड़ के बोला बेटा तेरी एन्टी को बोलने का पता नहीं चलता मुझे माफ़ कर दो और एन्टी को भी माफ़ी मांगने को वोला, आरती से क्षमा याचना मांगी। फिर भी दिल को वो सुकून-चैन नहीं पा रहा था। आरती बापिस अपने कमरे में आने लगीं और सीढ़ियों पे उतरते समय सोच लिया, मैं ये कमरा छोड़ के चली जाऊंगी। आरती ने अपने पति जफर खान को बोला 10/02/2021 को ये कमरा खाली करना है। और उधर से हाँ में हाँ मिलाते बोल दिया पर जफर ये कमरा छोड़ के जाना नहीं जाना चाहता था। गीता को इतना गुस्सा था,कि वो नफ़ीज़ा के परिवार से बात तक भी नहीं कर रही थी। आरती के ससुराल पक्ष से भी घर आने की जिद पकड़े हुए थे। आरती को मानसिक अत्याचार किया जा रहा था। तुम अगर घर नहीं आये तो हम अपनी बेटी तुम से ले लेगे,आरती अपनी बेटी से बहुत प्यार करती थी,जफर का साथ नहीं मिलने के कारण आरती को ससुराल जाना पड़ा। क्योंकि फिर भी जान-बुझ कर अपनी पत्नी का साथ नहीं दे रहा था और दूसरी ओर से नफ़ीज़ा आरती के ससुराल वालो के कान भरे जा रही थी। आरती भी बहुत गुस्से में अपना सारा समान छोड़ कर अपनी बेटी को अपने साथ लेकर ससुराल निकल पड़ी। इधर नफ़ीज़ा अब गीता के कान भरने शुरू कर दिये पर गीता बातों को नहीं भूली थी। गीता के नफ़ीज़ा को अच्छे से सुना दिया। अब नफ़ीज़ा आरती और गीता के दिल से बिलकुल उतर गई थी। अब नफ़ीज़ा की शक्ल देखना, क्या उसके बारे में बात करना भी पसंद नहीं था। अब गीता और आरती की बातें अब पीठ पीछे होती थी। अब जफर भी गीता के सामने नफ़ीज़ा से बात नहीं करता था। वो भी ऐसे दिखाता था अब मैं भी नफ़ीसा से बहुत नफरत करता हूँ। उसकी गन्दी हरकतों वैसे ही बढ़ती गई। इतना कुछ होने के बावजूद भी नफ़ीसा अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही थी। क्योंकि उसको दूसरों को बुरा और खुद को अच्छा बनाती थी। नफ़ीज़ा से घटिया औरत पूरी ज़िन्दगी में नहीं देखी होगी।
गीता और आरती के दिल से उसको हमेशा बददुआ ही निकलती थी। आखिरकार रब के घर में देर है अंधरे नहीं, देर से ही सही पर पाप का घड़ा फूट ही गया। नफ़ीज़ा के पति हामिद खान जफर खान को अपनी दुकान पर ले गए। हामिद खान और जफर दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। हामिद खान का बहुत बड़ा कारोबार है उनका खुद का एक खिलौने उपहार केंद्र है।(Toys Gifts Centre) सुबह के समय हामिद खान ने अभी अपनी दुकान खोली ही थी। जफर ने जैसे-तैसे हामिद खान से नफ़ीज़ा की आधी-अधूरी बातें शेयर कर दी। जफर ने बताया कि नफ़ीज़ा जिस लड़के से बात करती है। उसका नाम नैतिक राजपूत, डोडरा कंवर गांव का रहने वाला है। गीता जिस कंपनी में काम करती है।,उसी कंपनी में वो काम करता है। हामिद खान को ये लग रहा था उसकी पत्नी जो धोखा दे रही है और गीता नफ़ीज़ा को धोखा देने के लिए प्रेरित करती है। पर जफर ने अपने पैर पे खुद ही कुल्हड़ी मार दी। हामिद खान गुस्से में लाल- पीला हो कर घर आया और नफ़ीज़ा को 2/3 थप्पड़ मार दिया। नफ़ीज़ा के घर पे क्लेश पड़ गया। हामिद खान अपनी पति से धोखा खाये बहुत दुखी था। नफ़ीज़ा को समझ आ गया की मेरे पति को मेरी हरकतों का पता चल चूका है उसने खुद आ कर हामिद को सब बताना शुरू किया और उसने हामिद को आश्वासन दिया की मेरा किसी दुसरे पुरुष से कोई सम्बन्ध नहीं है।
नफ़ीज़ा ने खुद को बचने के लिए एक योजना बनी और हामिद खान खान को डरने लगी मैंने तुम्हे छोड़ कर चली जायगी। दोनों पति पत्नी की बहुत कहासुनी हुई,फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है। कि ज़फर सच बोल रहा है या नहीं। अब यही बात नफ़ीसा की तो बहुत चालाक औरत थी। उसने सारा इल्जाम जफर पर लगा दिया कि जफर मुझे मानसिक रूप से बहुत हिंसा करते हैं। इसके बाद ही मैंने जफर माफ किया पर अभी भी मुझे जफर बहुत तंग और मेरा मानसिक शोषण करता था। और मैं अब भी मानसिक हिंसा से गुजर रही हूं। और हामिद मैं आपको बता देती पर मुझ आप के गुस्से से डर लगता था। मानती हूँ मुझ से ये गलती हो गई जो मैंने आप से बात छुपाई। नफ़ीज़ा ने अपने पति हामिद खान से कहा। चाहे आप मीना,टीना और शिवानी से पूछ लो। जफर उनको भी ये रात को कॉल और तंग करता है। जफर मेरे पीछे हाथ धो के पड़ा है।
जफर के खिलाफ मानसिक यातना देने का आरोप लगाया है,लेकिन उसके मामले/आरोप को साबित करने के लिए सबूत का बोझ जफर पर था। हामिद खान खान ने जफर के साथ-2 गीता को भी कमरा खाली करने को बोल दिया।
गीता ने भी बोला मै कमरा क्यों खाली करू मेरी क्या गलती है? मैं अपनी छोटी बेटी को लेकर कहा जाऊगी और एक दम कमरा खाली करने को क्यों बोल रहे हो। गीता ने जाने से मना कर दिया मैं रूम खाली नहीं करुँगी। आपका निजी मामला है मुझे अपने निजी मामला में मुझे शामिल मत करो। नफ़ीज़ा आरती को फ़ोन करके कड़वी -2 बातें बोलती थी। अब बहुत हो गया पानी सर से ऊपर चला गया है।
नफ़ीज़ा को इस तरह बेइज्जत करने का हक़ गीता और आरती ने उसको क्या किसी को भी नहीं दिया था। पर हकीकत बस ये थी कि नफ़ीज़ा घमण्ड ही नही बल्कि एक बिगड़ी हुई औरत थी बस गीता और आरती अपनी बेइज्जती का बदला लेने की सनक सवार थी। उस दिन हम गलत नही थे हमे पता है पर इंसान भगवान नही हो सकता और ना ही हम इतने अच्छे हो सकते हैं कि अपने साथ किया बुरा बर्ताव भूल जायें।
नफ़ीज़ा की बाते कुछ दिन तक गीता और आरती ने बर्दाश्त कि फिर नफ़ीज़ा को चेतावनी भी दी। लेकिन उसकी वही हरकत में कोई बदलाव नहीं था। सासु-माँ भी जब उसकी (नफ़ीज़ा) बातों में आने लगी थी तो आरती दिल बहुत दुखा था।
किसी ने ठीक ही कहा है:- ज़िंदगी जीना आसान नहीं होता, बिना संघर्ष के कोई महान नहीं होता, जब तक न पड़े हथौड़े की चोट, पत्थर भी भगवान नहीं होता।
अब गीता और आरती उस नफ़ीज़ा जैसी नहीं थी। जो उसके हजारों राज अपने मन मे दफ़न किये हुए थे। वो दोनों भी चाहती थी तो उसके परिवार को बता सकती थी। पर गीता और आरती में उस नफ़ीज़ा जैसा कोई फ़र्क नही रह जाता। लेकिन उस नफ़ीज़ा को सबक सिखाना भी जरूरी था क्योंकि बुरा करना, जितना बुरा है तो बुरा सहना भी बहुत बुरा है। अच्छे के साथ अच्छा बनें बुरे के साथ बुरा नहीं, क्योंकि हीरे को हीरे से तराशा तो जा सकता है पर कीचड़ से कीचड़ साफ़ नहीं हो सकता है।
आरती ने भी उसको धमकी दी कि अगर उसने मेरी और गीता बुराई करना बंद नहीं किया तो मैं उसके चरित्र का कच्चा-चिठ्ठा जरूर सबके सामने खोल दूंगी। क्योंकि जितना मैं जानती हूँ। उसे उसका आधा भी वो खुद के बारे में नहीं जानती होगी। नफ़ीज़ा डर गई। आज उस बात को चार साल बीत गए लेकिन उसने गीता और आरती लिए कभी किसी से फिर कुछ नहीं कहा।
ऐसा नहीं है। कि उसको यूं धमकी देकर आरती को अच्छा लगा पर उस वक्त आरती कुछ और सूझा नहीं। आज तक भी नहीं समझ पाई हूँ। कि गीता और आरती सही किया या ग़लत। ग़लत नहीं लगता तो सही भी नही लगता।
गीता और आरती उसके साथ पेश तो वैसे ही आई जैसे वो गीता और आरती के साथ कर रही थी लेकिन गीता और आरती आज तक उसका बुरा नही किया। ना ही किसी को उसके बारे मे कुछ नहीं बताया। यकीन मानिये बुरा करना भी आसान नहीं होता।
दोस्तों हम आपके लिए अक्सर interesting stories लेकर आते रहेंगे, Hindi stories की इस कड़ी में हम आपके लिए एक और रोचक कहानी लेकर आये है सत्य घटना पर आधारित हिंदी कहानी है तब तक के लिए आप इसी तरह अपना प्यार और आशीर्वाद बनाये रखना उम्मीद है की ये आपको पसंद आएगी और एक अच्छी शिक्षा (teaching) आप को देगी……….
Thank You

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