प्रेम का पागल

तुम फूल हो तो मैं कोई काँटा नहीं जानम।
तेरा स्पर्श कोमल है मेरा चाँटा नहीं जानम।।

तुम चाँद हो नभ के, मैं चकोर हूँ जानम।
तुम मेघ अम्बर के , मैं तो मोर हूँ जानम।।

मेरे प्रेम को तू ना समझो है ये तेरी मर्जी।
मैंने तो तेरे दर पे लगाई आश की अर्जी।।

अपनालो या ठुकरा दो ,शिकवा हम नहीं करते।
विनयचंद प्रेम का पागल मुहब्बत कम नहीं करते।।

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