फूलों से कह दो चमन में

फूलों से कह दो चमन में अब न यूँ महका करें ।
खौफ से कांटों के अब सब काँटों का सिजदा करें ।

चाँद किस से जाके अपनी दास्ताँ ए दिल कहे ,
जब उजालों के ही आशिक चांदनी रुसवा करें ।

प्यार देने वाले भी तो खा रहे धोखे यहाँ ,
आदमी की जात का अब हम “भरोसा” क्या करें ।

अपने दिल की रहगुज़र पर जो अकेले ही चले ,
क्यूँ जमाने वाले उनके प्यार पर पहरा करें ।

इतना ही काफी है “नीरज” दिल के रिश्तों के लिए,
तुम हमें समझा करो और हम तुम्हे समझा करें ।

नीरज मिश्रा


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3 Comments

  1. Panna - November 21, 2015, 3:10 pm

    मुश्किल होता है, लफ़्जों में हालातों को कहना
    क्या खूब कहा भाई, हर कोई आदाब करे

  2. anupriya sharma - November 22, 2015, 7:49 pm

    nice poem

  3. Mohit Sharma - November 22, 2015, 8:14 pm

    kya khoob gazal kahi neeraj ji…very nice 🙂

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