बस कीजिए

शराफत को बस यहीं बस कीजिए ।
मीठा धुआँ है और एक कश लीजिए ।

ये तो उस बेवफा से बेहतर होती है ।
दिल तो जलाती, मगर होंठों पर होती है ।
बेवफा से तो वफा का साथ न मिला,
मगर यह साथ अक्सर होती है ।।
बेवफाई का आलम जिसने देखा है,
कहता फिरेगा हर शख्स लीजिए ।
मीठा धुआँ है और एक कश लीजिए ।
शराफत को बस यहीं बस कीजिए ।।

कहते हैं ले जाता है मौत की ओर।
कम्बख्त जीना चाहता है कौन और ।
अब तो ये जहाँन लगती है विरान,
संभल जाओ वक्त है, हर-शू यही शोर।।
वो क्या जाने हाले-दिल बुरा कहते हैं,
एक बार क्या सरशस लीजिए ।
मीठा धुआँ है और एक कश लीजिए ।
शराफत को बस यहीं बस कीजिए ।।

देवेश साखरे ‘देव’

सरशस- हमेशा

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13 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 19, 2019, 10:44 am

    वाह
    कमाल कर दिए

  2. Poonam singh - November 19, 2019, 3:55 pm

    Bahut khub

  3. nitu kandera - November 19, 2019, 4:56 pm

    Good

  4. राही अंजाना - November 19, 2019, 8:33 pm

    बढ़िया

  5. NIMISHA SINGHAL - November 20, 2019, 6:16 pm

    Wah

  6. Abhishek kumar - November 23, 2019, 10:25 pm

    छा गये गुरु

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