बहार- ए-गुलशन बुला रहा है

चले भी आओ मनमीत मेरे
बहार- ए-गुलशन बुला रहा है।
सजाई महफिल है प्रीत मेरे
बहार- ए-गुलशन बुला रहा है।।
नजरों के आगे तुम्हारा डेरा
धड़कनों में समाए हुए हो।
जस्न-ए-मुहब्बत करीब अपने
काहे को देरी लगाए हुए हो।
रस्म -ए-वफा के संगीत मेरे
बहार- ए-गुलशन बुला रहा है।।


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12 Comments

  1. nitu kandera - November 15, 2019, 5:20 pm

    wah

  2. देवेश साखरे 'देव' - November 15, 2019, 5:31 pm

    Bahut khub

  3. Ashmita Sinha - November 16, 2019, 12:16 am

    Nice

  4. NIMISHA SINGHAL - November 16, 2019, 12:50 am

    Radhay Krishna

  5. Charusheel Mane @ Charushil @ Charagar - November 16, 2019, 2:55 pm

    सुंदर रचना

  6. Abhishek kumar - November 23, 2019, 10:34 pm

    वाह

  7. Pragya Shukla - December 10, 2019, 11:15 am

    वाह

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