बेटियाँ

पैदा होने से पहले मिटा दी जाएँगी बेटियाँ,
बिन कुछ पूछे ही सुला दी जाएँगी बेटियाँ,

गर समय रहते नहीं बचाई जाएँगी बेटियाँ,
तो भूख लगने पर रोटी कैसे बनाएंगी बेटियाँ,

जहाँ कहते हैं कन्धे से कन्धा मिलायेंगी बेटियाँ,
सोंच रखते हैं एक दिन बोझ बन जाएँगी बेटियाँ,

चुपचाप गर यूँही कोख में छिपा दी जाएँगी बेटियाँ,
तो भला इस दुनियां को कैसे खूबसूरत बनायेंगी बेटियाँ॥

राही अंजाना

Comments

9 responses to “बेटियाँ”

  1. ashmita Avatar

    अच्छा लिखा है आपने

  2. Annu Burnwal Avatar

    बहुत अच्छा लिखे है।

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    वाह बहुत सुंदर

  4. राम नरेशपुरवाला

    Good

  5. राम नरेशपुरवाला

    वाह

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