भजन

सिर्फ एक बार दर्शन तू दे दो
और कोई भी दिल की तमन्न।नहीं है।
साथ कितना मिला जगत में मुझे।
सारे नातों के दीपक पलक में बुझे।।
मुझे अपनी शरण में तो ले लो
और कोई दिल की तमन्न ।नहीं है।
हर कदम पर मैं ठुकराया गया हूँ।
गैर क्या अपनों से भी रुलाया गया हूँ।।
मुझे अपनी शरण में तो ले लो
और कोई दिल की तमन्न।नहीं है।।

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6 Comments

  1. राम नरेशपुरवाला - November 8, 2019, 11:32 am

    Jai ho

  2. देवेश साखरे 'देव' - November 8, 2019, 1:22 pm

    सुन्दर रचना

  3. राही अंजाना - November 8, 2019, 2:58 pm

    वाह

  4. NIMISHA SINGHAL - November 8, 2019, 3:49 pm

    Wah

  5. Poonam singh - November 8, 2019, 4:03 pm

    Nice

  6. nitu kandera - November 8, 2019, 4:35 pm

    Wah

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