भूखी दास्तां (Poetry on Picture Contest)

भूखी दास्तां (Poetry on Picture Contest)

वो आंखे आज तक चुभती है मुझको
एक दम खाली,
खाली कटोरे सी
जो पूछ रही हों,
कह रही हो अपनी भूखी दास्तां
लफ़्ज ही बेबस है,
नहीं समेट सकते दर्द को उनके
खाली है वो भी
उनके खाली पेट की तरह!


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Panna.....Ek Khayal...Pathraya Sa!

5 Comments

  1. UE Vijay Sharma - February 16, 2016, 2:18 pm

    Beautiful expression dear Panna

  2. Ankit Bhadouria - February 16, 2016, 4:20 pm

    bht khoob…..

  3. Abhishek kumar - November 25, 2019, 9:03 am

    Maza

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