मय ही मय

हमें तो पता ही न था, ये नशा क्या शय है।
हिज्र-ए-महबूब के बाद, बस मय ही मय है।
दुनिया हमारी शराफ़त की मिसाल देती थी,
शरीफ़ों मे ही नहीं, रिंदों के बीच भी गये हैं।

देवेश साखरे ‘देव’

रिंद- शराबी

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9 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 13, 2019, 3:39 pm

    वाह वाह क्या बात है!!!!!!!!!!!

  2. Abhishek kumar - November 13, 2019, 4:38 pm

    Good

  3. nitu kandera - November 13, 2019, 5:42 pm

    wah

  4. NIMISHA SINGHAL - November 14, 2019, 9:58 am

    Nice

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