माँ

हम सभी का मूल माँ है
यदि नहीं होती जो माता
किस तरह इस सुरमयी
संसार को मैं देख पाता।
जनम जननी ने दिया
इससे अधिक कोई किसी को
दे नहीं सकता है कुछ भी
हो भले कैसा ही दाता।
माँ थी, तब हम आज हैं
माँ के बिना होते न हम भी,
फिर क्यों? तू प्यारे मनुज
दुत्कारता है आज माता।

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

  1. वाह प्रेरक भाव
    आज के मशीनी युग में मां बाप को भी एक मशीन समझने वाले
    बच्चों के लिए उत्तम सीख आपकी कविता में भरी हुई है।
    मां शब्द स्वयं एक कविता है। संगीत है। शक्ति है। भक्ति है। मुक्ति है। वाणी बुद्धि विद्या पंच प्रकृति सृष्टि की समस्त सिद्धि है।।
    उत्तम प्रयास।। बेहतरीन।।

    1. सादर धन्यवाद शास्त्री जी, आपने बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ समीक्षा में लिखी हैं, जो मेरे लिए पूंजी हैं, आभार

  2. मां शब्द स्वयं में ही अपने जन्म से लेकर अब तक की दास्तान है
    सुंदरता से परिपूर्ण कविता

  3. मां को समर्पित रचना बहुत ही हृदय विदारक मार्मिक है मां स्वयं में ईश्वर है ब्रह्मांड है तथा ममता का सागर है भाव प्रधान होने के कारण उत्तम रचना

New Report

Close