मां की महिमा

कौन बिन माँ के जगत में जन्म पाया ,
देव से बढ़कर तुम्हारी मातृ माया ,
है नही ऋण मुक्त कोई मातृ से ,
जन्म चाहे सौ मिले जिस जाति से ,
दूसरा है रूप पत्नी का तुम्हारा ,
जो पुरुष का रात दिन बनती सहारा ,
सुख दुःख में है सदा संधर्ष करती ,
धर्म अपना मानकर अनुसरण करती ,
तू बहन है तीसरे परिवेश में ,
भ्रातृ की रक्षा करे परदेश मे ,
ले बहन का रूप जब आती धरा पर ,
भावनाये याद है राखी बराबर ।
एक तेरा रूप पुत्री में समाया ,
पितृ सुख है पिता मन में समाया ,
कौन तेरी रात दिन रक्षा करेगा ,
हो वरण कैसे पिता चिंता करेगा ।
वंश की उन्नति तुम्हारे योग से ,
नित्य समरसता तुम्हारे भोग से ,
तू सुधा सी धार बन जीवन निभाती ,
प्राण की बलि भी चढ़ा कर मुस्कुराती ।

?? जयहिंद ??

प्रस्तुति – रीता जयहिंद

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

New Report

Close