Tag: माँ पर मार्मिक कविता

  • पिता

    किसी अनजान से बोझ से झुका झुका ये फल
    दरख्त़ की झड़ों में ढूंढ़ता सुकून के चन्द पल।

    कभी मिले पत्तों के नर्म साए
    तो कभी इनमे छनकर आती कुछ सख्त़ किरणें भी।
    बहुत रोया ये हर उस लम्हे
    जब इस दरख्त़ को आम का पेड़ कहा किसने भी।
    मुझे मिठास तब मिली जब इस दरख्त ने
    आसमां से ज़मीं तक हर चीज़ को चखा।
    गिरते पत्तों के बदलते रंग देखे
    तो इस उंगली को उम्र भर थामे रखा।
    मुझे न छुओ चाहे बनादो इन पत्तों के पत्तल
    किसी अनजान से बोझ से झुका झुका ये फल…..

    ये नीम का पत्ता बरसों से आज तक
    मुझे अपने बोल तक समझा न सका।
    और रात आंधी में मेरे कंधे आ बैठे इस कंकर से
    मैं ज़मीन के राज़ उगलवा न सका।
    कल एक पखेरू ने पास बैठ
    मुझसे इस तरह झुकने का राज़ पुछा।
    मैने कहा गिरने के बाद न मिले किसी महल की दावत
    न किसी मंदिर की पूजा।
    स्वर्ग तो मिले तब जब इन्ही झड़ों में जाएं पिघल।
    किसी अनजान से बोझ से झुका झुका ये फल…..

  • माँ

    माँ

    देखा किसी ने नहीं है मगर बहुत बड़ा बताते हैं लोग,
    कुछ लोग उसे ईश्वर तो कुछ उसे खुदा बताते हैं लोग,

    पता किसी के पास नहीं है मगर रस्ता सभी बताते हैं लोग,
    कुछ लोग उसे मन्दिर तो कुछ उसे मस्ज़िद बताते हैं लोग,

    ढूढ़ते फिरते हैं जिसे हम यहां वहां भटकते दर बदर,
    तो कुछ ऐसे भी हैं जो उसे तेरी मेरी माँ बताते हैं लोग।।

    राही (अंजाना)

    (Winner of ‘Poetry on Picture’ contest)

  • माँ

    तुम शान थी मेरी ,
    तुम मान थी मेरी ,
    तुम अभिमान थी मेरी ,
    इस दुःख भरी दुनिया में ,खुशियों की पहचान थी मेरी !
    जब इस दुनिया में आयी ,पहचान कराया माँ तमने ,
    परिवार में बेटो के चाह में पागल ,
    पर मैं बेटो से कम नहीं यह स्थान दिलाया तमने !
    बचपन से बेटो बेटियों की भेद भाव की सीडी देख बड़ी हुई ,
    पर तुम हर सीडी के बिच खड़ी हुई ,
    मेरी बेटी बेटो से कम नहीं इस बात पे तुम अड़ी रही !
    आज भी याद है माँ स्कूल का वो पहला दिन
    कैसे कटे थे हर घड़ी माँ तेरे बिन !
    उस कड़कती धूप में , वो बरसती सावन में
    माँ तमने मेरा साथ दिया हर उस उत्सव पवन में !
    चाँद सितारों से हस्ती खेलती वो गलिया,
    कितनी प्यारी थी ना माँ हमारी वो दुनिया !
    कैसे गुज़रे वो हसीन से पल ,
    आज लगता है बचपन तो था कल !
    माँ की बिटिया आज सायानी हो गयी ,
    छोड़ अपना घर किसी की बहुरानी हो गयी !
    आज समझ आया कैसे कर लेती थी माँ इतना काम ,
    घर , आंगन की मालकिन पाती जग का सम्मान !
    हर पथ पे साथ दिया माँ तमने मेरा ,
    फिर क्यों जा रही छोड़ साथ मेरा !
    फिर क्यों आ रही माँ हर बात याद तेरी ,
    वो प्यारी मुश्कान तेरी, वो बिटया रानी कहना मेरी!
    लगता है उस खुदा की प्यारी हो माँ ,
    जिसने इतनी जल्दी बुला लिया तम्हे आसमां !
    उस रब से मेरी है ये दुआएँ ,
    मेरी माँ की झोली में खुशिया ही सदा बरसाए !
    भूल नहीं सकती माँ तेरे करम को जब तक हु ,पूजा करुँगी तेरी चरण को !
    ये खुदा एक छोटी सी मेरी है तमन्ना ,
    जब ,जब दुनिया में आउ उसकी आखो से ही देखु जमाना !

    …………..सौंदर्य निधि ……………………

  • माँ

    बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया,

    मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया,

    भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने,

    उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया,

    आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी,

    आज कदमों में ही माँ के मेरा आसमान हो गया।।

    राही (अंजाना)

  • माँ

    बनाकर खुद से खुद पर ही हैरान हो गया,

    मेरी माँ की सूरत के आगे वो बेजान हो गया,

    भेज दिया जिस पल मेरे घर में माँ को उसने,

    उसका खुद का घर जैसे मानो वीरान हो गया,

    आसमाँ पर जब तब नज़र चली जाती थी कभी,

    आज कदमों में ही माँ के मेरा आसमान हो गया।।

    राही (अंजाना)

  • माँ

    पथ दिखाके,लक्ष्य दिखती’
    है पथ प्रदर्शक माँ

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • दादी माँ

    दादी माँ

    दादी पोते के बीच का रिश्ता बहुत अजीब देखा है,

    किस्से कहानियों का भी रूप मैने सजीव देखा है,

    सफेद बाल मुलायम खाल का स्पर्श सच्ची याद है मुझे,

    बिन दाँतों वाली दादी को मैने भी अपने करीब देखा है।।

    राही (अंजाना)

  • माँ

    माँ ममता की मूरत है,
    प्यार का संसार है माँ

    तपते हुए जीवन में,
    शीतल सी फुहार है माँ

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • माँ मुझे जग में आने दो

    माता मुझको आने दो,
    बाबा मुझको आने दो

    है कसूर क्या मेरा,
    जो आने से रोक रहे

    में भी हूँ रक्त तेरा,
    क्यों इसको भूल रहे

    मुझे किलकारियां लेने दो,
    माता मुझको आने दो

    भूल हुई क्या मुझसे बाबा,
    मैं क्या तेरी संतान नहीं

    बेटा ही तेरी शान है बाबा,
    मैं तेरा अभिमान नहीं

    घुट घुट कर,गर्भ मैं सिसक रहे
    जग मैं जीवन जीने दो

    बाबा मुझको आने दो

    शक्ति का अंश हूँ मैं,
    तेरा ही वंश हूँ मैं

    क्या मैंने अपराध किया,
    मुझे गर्भ मैं मत मारो

    मेरी साँसे मत छीनो
    अस्तितव मेरा मत छीनो

    बाबा मुझको आने दो,
    माता मुझको आने दो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • माँ गंगा

    माँ गंगा तुम्हे नमन,
    चूमू तेरे चरण

    तेरी लहरों से शीतलता आये,
    लगे यु माँ का आँचल

    चारो दिशा धारा बहती
    करती हैं कल कल कल

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • माँ सरस्वती

    झंकार उर में मात कर दो,
    माँ वीणा पाणी वर दायनी

    हैं अवगुण जहाँ,
    हुंकार भर दे

    अज्ञान तम दूर भागे,
    मेरे सर पे हाथ रख दो

    झंकार उर में मात करदो

    -विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

  • मेरी गलती माँफ करो।

    मेरी गलती माँफ करो।

    अगर हुई गलती मुझे माँफ करो,
    हर गलती मेरी शर्मनाक है, या तुम मार गिरावो या माँफ करो।
    गलती किया इसलिए माँफी माँग रहा,
    अगर लगता गलती– गलती का अनुमोदन है तो इसे भी स्वीकार करो,,
    गलती हुई मुझसे इतनी पर दु:ख मत होना,
    तुम्हे पता है विजली भी गिरती ऊँचे पेड़ पर गिरता तब पर भी वतावरण उसे माँफ करता ,,नई पौधा जन्म देने का प्रयास करता,
    या तो तुम मेरी गलती माँफ करो ,या मार गिरावो।
    मुझे से गलती हुई पर दु:ख मत होना,
    मुझसे हुई गलती सचमुच मे लज्जा की बात है,
    मेरी अपनी गलती स्वय नही दिखा,
    इसलिए मै इतना बड़ा गदम उठाया,,
    एक छोटा भाई के नाते मुझे माँफ करो !!
    ये तुम्हारी मर्जी मुझे माँफ करो या मार गिरावो,,
    मै लहरो की शक्ति से परिपक हूँ उसमे भी तुफान आती पर किनारा उसे काटकर वापस कर देता,,
    या तो तुम मुझे माँफ करो या मार गिरावो।

    ज्योति सिह
    मो0 9123155481

  • माँ

    माँ न होती,
    तो यह श्रष्टि न होती

    पृथ्वी है माँ,
    प्राण है माँ

    उचित अनुचित की ,
    द्रष्टि है माँ

    -विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)-

  • मां

    जन्म दिया मां तूने ही इस काबिल मुझे बनाया है,
    हर फर्ज अपना‌ मेरे प्रति निभाया है।
    दिल से दिल का यह अनमोल रिश्ता,
    वाह खुदा क्या बनाया है।।

  • टुकड़े माँ के दिल के हजार हो गए

    टुकड़े माँ के दिल के हजार हो गए

    टुकड़े माँ के दिल के हजार हो गए,
    जिस पल बंटवारे में उसकी ममता आई।।
    – राही (अंजाना)

  • मेरी गलतीयाँ माँफ कर देना

    मुझे माँफ कर देना”
    “”उतर ना सकी तेरी महोब्बत रूपी सीढ़ी पर।
    हाँ ?
    मुझे ले बैठा;लज्

  • मेरी गलतीयाँ माँफ कर देना

    मुझे माँफ कर देना”
    “”उतर ना सकी तेरी महोब्बत रूपी सीढ़ी पर।
    हाँ ?
    मुझे ले बैठा;लज्

  • सिफ़त माँ के मेरे बड़े साफ़ नज़र आते हैं

    सिफ़त माँ के मेरे बड़े साफ़ नज़र आते हैं

    सिफ़त माँ के मेरे बड़े साफ़ नज़र आते हैं,
    तामील दिलाने को मुझे जब वो खुद को भूल जाती है,

    पहनाती है तन पर मेरे जिस पल कपड़े मुझे,
    वो सर से खिसकता हुआ अपना पल्लू भूल जाती है,

    बेशक मुमकिन ही नहीं एक पल जीना जिस जगह,
    वहीं ख़्वाबों की एक लम्बी चादर बिछा के भूल जाती है।।

    राही (अंजाना)

  • मगर मुझे तो माँ का मैला आँचल ही सुहाता है

    मगर मुझे तो माँ का मैला आँचल ही सुहाता है

    बेशक खुशबू से भरा होगा मेरे दोस्त तेरा सनम,
    मगर मुझे तो माँ का मैला आँचल ही सुहाता है।।

    – राही (अंजाना)

  • माँ के दिल और पिता के दिमाग से परखा जाएगा

    माँ के दिल और पिता के दिमाग से परखा जाएगा

    माँ के दिल और पिता के दिमाग से परखा जाएगा,

    ये बचपन का पौधा बड़े हिसाब से ख़र्चा जाएगा,

    मेहनत लगी है गहन किसकी परवरिश में कितनी,

    दो एक रोज़ में सरेआम इसका चर्चा हो जाएगा।।

    राही (अंजाना)

  • माँ

    दुनिया की भीड़ में जब कभी अकेली होती हूँ
    तो बहुत याद आती है मुझे मेरी माँ
    खुशियाँ हो या गम हो हर सुख दुःख में
    बहुत याद आती है मुझे मेरी माँ
    जब भी किसी तकलीफ़ में होती हूँ
    तो बहुत याद आती है मुझे मेरी माँ
    जब कभी नींद न आती है मुझे
    तो बहुत याद आती है मुझे मेरी माँ
    जब होती हूँ बेचैन तो बस
    तेरी सुकून की गोद याद आती है मुझे मेरी माँ
    जब दिल याद में तेरी भीगा होता है
    तो सिर्फ तेरा ही आँचल याद आता है मुझे मेरी माँ।।

  • जो उड़ रहे थे परिंदे बेख़ौफ़ खुले आसमाँ में,

    जो उड़ रहे थे परिंदे बेख़ौफ़ खुले आसमाँ में,

    जो उड़ रहे थे परिंदे बेख़ौफ़ खुले आसमाँ में,
    आज उस खुदा ने उन्हें ज़मी का मुरीद कर दिया॥
    – राही

  • तेरा प्यार अनंत है माँ

    हर पल मेरी परवाह करते

    थकती क्यों तू न है,

    माँ मुझको इतना बतला दे

    तेरा भी क्या सपना है।।

     

    चंदा मामा के किस्से कहकर

    कैसे हँसते-हँसते तू लोरियाँ सुनाती थी

    माँ मझको इतना बतला दे

    इतना स्नेह कैसे तू लूटा पाती थी

     

    तुझसे जो थोड़ा दूर हो जाऊँ

    पल-पल मझसे तू पूछते जाती थी

    कैसा है बेटा कहकर,

    खाना समय से खा लेने की सलाह दे जाती थी

     

    मेरे सपने को अपना कहकर

    निस्वार्थ प्रेम जो तूने दिखलाया

    हर पल प्यार के मायने को

    तूने बेहतर ढंग से समझाया

     

    मेरी कोशिश हर पल है तुझको इतना सुकूँ दूँ

    जब-जब तू हँस दे ख़ुशियों से,

    मन को मेरे भी मैं तब सुकूँ दूँ,

     

    तेरा प्यार अनंत है माँ,

    अब शब्दों में कितना वर्णन करूँ

    ईश्वर की इस अद्भुत रचना को मैं बस

    अब तो हर पल नमन करूँ।।

     

    -मनीष

  • माँ

    माँ

    माँ! तुम बहुत याद आती है,
    जब मै अकेले मे होता ,
    आपका चेहरा नजर आता आँसु को रोक ना पाता ।।
    मेरी अब ख्वाहिश है एे खुदा,
    मै फिर से माँ के पास आ जाऊ, माँ के आँचल मे इस तरह लिपट जाऊ।
    कि मै फिर से न्नहा हो जाऊ।
    माँ !!
    तेरी ही खुशी के खातिर–
    अब मै चल रहा हूँ सही रास्तो पर तेरे भी कुछ सपने होगे
    खंडर जैसे मंजिल को सजाने की।।

    ज्योति
    mob no 9123155481

  • मां

    एक मां ही तो है जो अब भी अपनी लगती है
    वरना इस परायी दुनिया में कौन अपना है

  • कुछ भी नहीं छुपाता हूँ मैं माँ को सब कुछ बताता हूँ

    कुछ भी नहीं छुपाता हूँ मैं माँ को सब कुछ बताता हूँ,
    माँ मुझ पर प्यार लुटाती है मैं सब कुछ भूल जाता हूँ,
    मैं भूखा जब हो जाता हूँ माँ मुझको खूब खिलाती है,
    पर कभी कभी माँ मेरी चुप के भूखी भी सो जाती है,
    मैं दूर कहीँ भी जाता हूँ माँ मुझको पास बुलाती है,
    मैं माँ को भूल न पाता हूँ माँ मुझको भूल न पाती है।।
    – राही (अंजाना)

  • “माँ”

    “माँ”

    कितनी बार धुप मे खुन को जलाई तुने “माँ” मेरी लिए चंद रोटियाँ लाने मे।
    कितनी बार तुने खुशी बेच ली “माँ” तुने मुझे सुलाने मे।।
    कितनी बार दुसरे से लड़ गई
    ” माँ ” मुझे बस के सीट पर बैठाने मे,
    कितनी बार अपनी सोना– चाँदी बेची “माँ” मुझे रोजगार दिलाने मे।
    कभी खुशी कभी आँसु बेची माँ मुझे घर से बाहर भेजने मे।
    तब पर भी ये मतलबी दुनिया तुझे क्यो छोड़ देते है, “माँ “बुढ़े हालतो मे।।
    तब पर बद्दुआ नही शब्जी बेच कर देती माँ ।।

    माँ तेरे हाथो कि कमाल अब भी याद है जिस दिन आपका हाथ सिर पर जाता कब्बडी मे दुसरे को पटक कर आती मै।।
    माँ जैसा दुनिया मे कोई दर नही।।

    ज्योति
    मो न०9123155481

  • आई

    आई तुझ्यासाठी मी काय लिहू,
    आणि किती लिहू,
    तुझ्या महितीसाठी शब्दच अपुरे आहेत,
    तुझ्यासमोर सगळे जगच फिके आहे।।

    आई तुझ्या बद्दल बोलायला मला
    शब्दच उरणार नाहीत.
    आणि तुझे उपकार फेडायला मला
    हजारो जन्म पुरणार नाहीत।।

    आजपर्यंत तू माझा प्रत्येक हट्ट पूर्ण केला,
    अगदी निस्वार्थ भावनेने,
    तसेच माझी काळजी घेतलीस निष्ठेने.

    माझ्या आयुष्यातील शांतता तू,
    माझ्या मनातील गारवा तू,
    अंधाऱ्या आकाशातील चंद्र तू, माझ्या आयुष्यातील चांदणे तू,

    ढगाळ वातावरणातील पावसाच्या सरी तू,
    मला वाट दाखवणारा रस्ता तू,
    माझा भास तू, माझा श्वास तू,
    माझ्या कवितेतील शब्द तू,
    माझी भक्ती तू, माझी शक्ती तू,

    माझ्या चेहऱ्यावरील हास्य तू!!

  • दुनिया जीतकर मैं ममता हार गयी

    चल पड़ी उस राह पर,जहां काटें बहुत थे|
    माँ, तेरी फूल जैसी गोदी से उतरकर ये काटें बहुत चुभ रहे थे|
    चलते हुए एक ऐसा काटा चुभा था,
    कि ज़ख्म से खून आज भी निकल रहा है|
    माँ, मंजिल पर तो पहुँच गयी हूँ,
    पर इसकी ख़ुशी मनाने के लिए है तू ही नहीं है|
    यूं तो मैं तेरी मल्लिका थी,
    पर मैं तुझे रानी बनाना चाहती थी|
    लेकिन पता नहीं था मुझे कि तेरे दिल में,
    मुझे पाने का फ़कीर जिंदा था|
    माँ, वो तेरे शब्द जो मैंने सफलता के फितूर में अनसुने किये थे,
    आज सिर्फ वो ही दिन रात मेरे कानों को सुकून देते हैं|
    तूने कहा था कि ज़िन्दगी ख्वाहिशों से नहीं ज़रूरतों से जीते हैं,
    पर मैं तो ख्वाहिशों के पीछे ही पागल थी|
    भूल गयी थी कि मेरी ख्वाहिश तेरी ज़रुरत थी,
    पर अब…….दोनों ही नहीं हैं|
    नाम पाने की अंधी चाहत में मुझे,
    तेरे मुझको पाने के आँसू ही दिखाई नहीं दिए|
    तू ही मेरी कहानी की कातिब थी,
    पर अब……..दोनों ही नहीं है|
    माँ, तेरी वो तकिया आज भी गीली है,
    बस फ़र्क इतना है की पहले
    वो मेरी याद में गिरे तेरे आँसुओं की नमी थी
    और आज तेरी याद में गिरे मेरे आँसुओं की नमी है|
    जीत गयी हूँ पूरी दुनिया पर मैं तेरी ममता ही हार गयी|
    इस कामयाबी पाने की तेज रफ़्तार वाली दौड़ में,
    भूल गयी थी की तेरे घुटनों में दर्द होगा|
    अब तो बस तेरी यादें ही हैं,टूटे हुए इरादे ही हैं|
    सोचती हूँ की तू फिर अपने हांथों से रोटी खिलायगी,
    अपने हांथों से मेरी गुथी छोटी बनायेगी,
    फिर से मुझे अपनी गोद में सुलायेगी|
    सोचूं कि तू रसोईघर में है,
    और तेरे हांथों में मेरे लिए खाना है|
    पर पीछे मुड़कर देखूं तो वहां,
    कामवाली दीदी का सिर्फ बहाना ही है|
    माँ तेरी पायल आजकल मैं ही पहनने लगी हूँ,
    ताकि खुदको तेरे होने का एहसास करा सकूं|
    पर ये पायल भी मेरे पैरों में बजती नहीं,
    और ये मुझमे जचती भी नहीं|
    माँ, दिन रात काम करके तेरा सुकून चाहती रही,
    पर भूल गयी कि मेरी नींद में तेरा सुकून था|
    माँ की ममता एक ऐसा ही फ़र्ज़ है,
    कभी न अदा होने वाला क़र्ज़ है|
    माँ, तेरी यादों में लिपटकर रो चुकी हूँ,
    तेरे साथ रहने के सारे लम्हे अब खो चुकी हूँ|

  • मॉ बोली लाठी से मारुँगी ।??

    आज मेरे पास सावन की मातृ दिवस की लिंक आई ।
    फिर क्या इसे देखकर मुझे भी सनक आई ।
    फिर मैने भी कलम उठाई ।
    और पुरी महेनत से एक कविता बनाई ।
    फिर मैने मेरी कविता सबसे पहले मॉ को सुनाई ।
    मॉ हल्का सा मुस्काई ।
    और बोली बेटे तेरी ये कविता तो समझ ना आई।
    पर तेरी ऑखो मे मेरे लिये इज्ज्त देखकर ऑखे भर आई ।
    मॉ को रोता देख मेरी ऑखे भी भर आई ।
    इतना देख मॉ रोना छोड अचानक गुस्से मे आई ।
    और उसने अपने पास पडी लाठी उठाई।
    और दोनो हाथो से मेरी ओर घुमाई।
    और बोली अगर आज के बाद तेरी ऑखो मे ऑसु दिये दिखाई ।
    तो इसी लाठी से लगाऊगी पिटाई ।
    इतना कहकर मॉ मुस्काई ।
    फिर क्या मॉ बेटे ने मिलकर रोटी खाई ।
    रोटी खाने के बाद मुझे बहुत गुस्सा आई ।
    कि मैने मॉ के ऊपर एक कविता तक ना बना पाई।
    तभी मॉ मेरे पास आई ।
    और मुझे एक बात समझायी।
    कि तु क्या बडे बडे कवियो ने तक मॉ के ऊपर कविता ना लिख पाई ।
    तु तो फिर भी उस रहा पर है एक नन्हा सिपाही ।
    बस मॉ ने इतनी सी बात मॉ ने बताई ।
    तब बात समझ मे मुझे आई ।
    सच कहता हुँ यारो कि भगवान ने मॉ क्या शक्सीयत बनाई ।
    फिर मैने एक बार फिर कलम उठाई ।
    फिर मैने इस कहानी से कविता बनाई ।
    अगर आप को ये कविता पसन्द आई ।
    तो vote करे और करे reply .

    हम जो है। UP से है भाई।
    जो भी करते है हट के करते है भाई।
    सब ने शब्दो से कविता बनाई।
    और इसलिऐ तो हम ने कहानी से कविता बनाई ।
    माफ कर दो यारो हम ने लिखने के बाद कविता नही थी दोह्राई
    कुछ गलती थी पहले इसलिऐ एक ही दुबारा लिखने की नौबत आई ।
    इसलिये माफ करदो भाई ।

  • माँ मेरी

    संघर्षों में जीवन की तू परिभाषा कहलाती है,

    रंग बिरंगी तितली सी तू इधर उधर मंडराती है,

    खुद को पल- पल उलझा कर तू हर मुश्किल सुलझाती है,

    खुली हवा में खोल के बाहें तू मन ही मन मुस्काती है,

    आँखे बड़ी दिखाकर तू जब खुद बच्ची बन जाती है,

    मेरे ख़्वाबों को वहम नहीं तू लक्ष्य सही दिखलाती है।।

    जो भी मिले किरदार निभा कर दृष्टि में सबकी आती है,

    बस एक माँ ही है जो हर दिल की पूरी दुनियाँ कहलाती है।।

    राही (अंजाना)

  • ममता

    एक युवती जब माँ बनती है,
    ममता के धागों से बच्चे का भविष्य बुनती है,
    ज़ज्बात रंग -बिरंगे उसके,
    बच्चे के रंग में ढलते हैं,
    दिल के तारों से हो झंकृत,
    लोरी की हीं गूंज निकलती,
    माँ अल्फाज़ में जैसे हो,
    दुनियां उसकी सिमटती चलती ,
    फिर क्या, नयनों में झिलमील सपने,
    आँचल में अमृत ले चलती ,
    पग -पग कांटे चुनती रहती,
    राहों की सारी बाधाएं,
    दुआओं से हरती चलती,
    हो ममता के वशीभूत बहुत,
    वो जननी बन जीवन जनती है,
    एक युवती जब माँ बनती है,
    ममता के धागों से बच्चे का भविष्य बुनती है।।

  • एक माँ ही तो है

    एक माँ ही तो है
    जिसने मुझसे और मैंने उससे
    बिना एक दूजे को देखे बेपनाह प्रेम और साथ निभाया है।

    एक माँ ही तो है
    जिसने मेरे बिना कुछ बोले मेरी हर एक बात को समझ अपनाया है।

    एक माँ ही तो है
    जिसने हर पल मुझे सबकी बुरी नज़रों से तिलक लगाकर बचाया है।

    एक माँ ही तो है
    जिसने मुझे तपती धूप में भी भोजन बनाकर मेरा पेट भरवाया है।

    एक माँ ही तो है
    जिसने हर पल, हर क्षण मेरा साथ बिना किसी स्वार्थ निभाया है।

    एक माँ ही तो है
    जिसने मुझे इस जीवन में लाकर मुझे ये दुनिया देखने का अवसर दिलवाया है।

    एक माँ ही तो है
    जिसने हर तकलीफ से मुझे निकलने का सही मार्ग दिखलाया है।

    एक माँ ही तो है
    जिसने मुझ पर हमेशा ही आँख मूँद कर विश्वास अपना जताया है।

    एक माँ ही तो है
    जिसने मुझे संस्कारों की छाँव में पाल पोस एक अच्छा नागरिक बनाया है।

    एक माँ ही तो है
    जिसने कभी न हार मानने की सीख दे कोशिश करना सिखलाया है।

    एक माँ ही तो है
    जिसने कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी डट कर खड़े रहना बतलाया है।

    एक माँ ही तो है
    जिसने अपना सम्पूर्ण जीवन अपने बच्चों और परिजन पर न्योछावर कर डाला है।

    एक माँ ही तो है
    जिसके होने से हमसे इस जग में अपना नाम कमाया है, अपना नाम कमाया है, अपना नाम कमाया है।

  • लाख अपने गिर्द हिफाजत की लकीरें खीचूँ

    लाख अपने गिर्द हिफाजत की लकीरें खीचूँ,
    एक भी उन में नहीं “माँ ” तेरी दुआओं जैसी,

    लाख अपने को छिपाऊँ कितने ही पर्दों में,
    एक भी उन में नहीं “माँ” तेरे आँचल जैसा,

    लाख महगे बिस्तर पर सो जाऊँ मैं,
    एक भी नहीं “माँ” उनमें तेरी गोद जैसा,

    लाख देख लूँ आइनों में अक्स अपना,
    एक आइना भी नहीं “माँ” तेरी आँखों जैसा,

    लाख सर झुका लूँ उस मौला/भगवान के दर पर,
    एक दरबार भीं नहीं “माँ” तेरे दर जैसा॥
    राही

  • कितनी दफ़ा उँगलियाँ अपनी जला दी तूने

    कितनी दफ़ा उँगलियाँ अपनी जला दी तूने…
    ‘माँ’ मेरे लिए चंद, रोटियाँ फुलाने में !

    कितनी दफ़ा रातें गवां दी,
    “माँ” तूने मुझे सुलाने में,

    कितनी दफ़ा आँचल भिगा दिया,
    “माँ” तूने मुझे चुपाने में,

    कितनी दफ़ा छुपा लिया,
    “माँ” बुरी नज़र से तूने मुझे बचाने में,

    कितनी दफ़ा बचा लिया,
    “माँ” गलत राह तूने मुझे जाने में,

    कितनी दफ़ा लुटा दिया खुद को,
    “माँ” तूने मुझे अमीर बनाने में॥

    कितनी दफ़ा..
    – राही

  • मां

    खामोशी को समेटकर कुछ अल्फाजो का पिटारा लाया हूं,
    उस ख़ुदा से भी बढ़कर है वो जिसके बारे में आपको कुछ बताने आया हूं।
    उसकी हिदायतों से मैने जिंदगी के हर रंग में रंगना सीखा है,
    उसका आशीर्वाद पाकर हर चुनौती से लड़ना सीखा है।
    हमारी छोटी सी चोट को देखकर ही बड़ी आसानी से रो देती है,
    शायद इसलिए हर इंसान के लिए उसकी मां भगवान से भी बढ़कर होती है।

    वो मुझे जानती थी भी नहीं थी जब नौ महीने उसने मुझे अपनी कोख में पाला था।,
    अपने सारे सपनों को छोड़कर , हर वक़्त उसने मुझे संभाला था।
    वो आज भी मेरी ख्वाहिशों के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देती है,
    शायद इसलिए हर इंसान के लिए उसकी मां भगवान से भी बढ़कर होती है।

    उसने मेरे लिए ना जाने कितनी राते जागते हुए निकली होगी,
    जब भी बाहर गया होउगा तो जाने कितनी शामे मेरे इंतजार में काटी होगी।
    सच तो ये है कि वो हमेशा मेरे खातिर दिन रात एक कर देती है,
    शायद इसलिए हर इंसान के लिए उसकी मां भगवान से भी बढ़कर होती हैं।

    वो अक्सर मेरी बाते बिना शब्दों के समझ जाती है,
    तो अपने जवाब भी वो बस इशारों में दे जाती है।
    उसकी गोद में जाते ही हमारी ज़िन्दगी हमेशा महफूज़ होती है,
    शायद इसलिए हर इंसान के लिए उसकी मां भगवान से भी बढ़कर होती है।

    उसके चेहरे की वों खुशी एक अलग सा सुकून देती है,
    उसके पास होने का एहसास मेरे जीवन को पूरा कर देती है।
    उसके चरणों की धूल मंदिर और मदीना की चोखट से भी बढ़कर होती है,
    शायद इसलिए हर इंसान के लिए उसकी मां भगवान से भी बढ़कर होती है।

  • तुम कब आओगी

    शाम हो गई तुम्हे खोजते माँ तुम कब आओगी
    जब आओगी घर तुम खाना तब ही तो मुझे खिलाओगी,
    रात भर न सो पाई करती रही तुम्हारा इंतजार
    सुबह होते ही बैठ द्वार निगाहें ढूंढ रही तुम्हे लगातार,
    पापा बोले बेटा आजा अब माँ न वापिस आएगी
    अब कभी भी वह तुम्हे खाना नहीं खिलाएगी,
    रूठ गई हम सब से मम्मी ऐसी क्या गलती थी हमारी
    छोड़ गई हम सबको मम्मी ऐसी क्या खता थी हमारी,
    ढूंढ रही हर पल निगाहे न जाने कब मिल जाओगी
    इक आस लिए दिल में कि वापिस जरूर आओगी,
    रो रहा है दिल क्या चुप नहीं कराओगी
    सोने को तत्पर हूं माँ मैं क्या गोद में नहीं सुलाओगी,
    बतादो ना प्लीज मम्मी तुम कब वापिस आओगी।
    By-
    मानसी राठौड़d/oरविंद्र सिंह राठौड़

  • जब मैं तुम्हे लिखने चली

    जमाने में रहे पर जमाने को खबर न थी
    ढिंढोरे की तुम्हारी आदत न थी
    अच्छे कामों का लेखा तुम्हारा व्यर्थ ही रह गया
    हमसे साथ तुम्हारा अनकहा सा कह गया
    जीतना ही सिखाया हारने की मन में न लाने दी
    तो क्यों एक पल भी जीने की मन में न आने दी
    हिम्मत बांधी सबको और खुद ही खो दी
    दूर कर ली खुदा ने हमसे माँ कि गोदी
    दिल था तुम्हारा या फूलों का गहना
    अब जुदाई को तुमसे सदा ही सहना
    रोता रहा दिल आँखों ने साथ न दिया
    फैसले के खुदा ने घर सूना कर दिया
    बड़ा अनमोल है यह रिश्ता तुम संग गहराया यह रिश्ता
    जब पलकें पलकों से मिली दिल ने तेरी तस्वीर दिखाई
    आँखे खोली जब हर जगह माँ तू ही नजर आई
    किस्मत की लकिरों ने इक पल मुझे मिटा दिया
    पर इसने जीवन में संभलना सिखा दिया
    नयन नीर की अविरल धारा बह निकली
    आज जब माँ मैं तुम्हे लिखने चली।।
    सर से जो तेरा साया उठा माँ रोने से न बच पाई
    साथ छोड़ दिया हम सबका तूने दे कर के तन्हाई
    जब याद आई तेरी माँ दिल मेरा रोने लगा
    शरीर मेरा आत्मा से साथ खोने लगा
    याद में तेरी माँ जीना जीना ही क्या
    बिन माँ के जो पला वो बचपना ही क्या
    ढाँढस बाँधी सबने सहायता के हाथ बढादिए
    बिन माँ के बचपने में हम बदनसीब ही जिये
    एक रोज तुने कहा था के साथ कभी न छोड़ेगी
    पर पता ना था के तू इतना जल्दी वादा तोड़ेगी
    आँखो से मोतीयों की माला बह निकली
    आज जब माँ मैं तुम्हे लिखने चली।।
    सोचा न था इस कद्र जीवन बदलेगा
    हमारे साथ खुदा इस कदर खेल खेलेगा
    आशा की किरण हमारी न जाने कहाँ खो गई
    दिया जलाकर तू न जाने कहाँ चली गई
    तेरी तस्वीर देखूं जब भी मैं इक पल तू सामने आ जाती है
    तेरी मुझसे कही एक एक बात फिर याद आती है
    तेरी पायल की आवाज कानों में गूंजने लग जाती
    जब मैं तेरे गहनों को हूं हाथ लगाती
    हॉस्पिटल से माँ को है कब लाना
    मुश्किल था माँ ये किटु को समझाना
    कोशिश रहती कि किटू को तेरी याद न आए
    पर बेटी के दिल से माँ को कोई कैसे निकाल पाए
    कुलदीपक की चाह में चिराग ही बुझ गया
    सपना साथ रहने का तुम्हारे अधूरा ही रह गया
    अश्कों की धारा फिर बह निकली
    आज जब माँ मैं तुम्हे लिखने चली।।
    BY-
    मानसी राठौड़ D/O रविन्द्र सिंह

  • इतने हैं तेरे रूप के मैं सबको गिना नहीं पाउँगा,

    इतने हैं तेरे रूप के मैं सबको गिना नहीं पाउँगा,

    खोल कर रख दी पल्लू की हर एक गाँठ तुमने,

    मैं तुम्हारे प्रेम का किस्सा सबको सुना नहीं पाउँगा,

    डर कर छिप जाता था अक्सर तेरे पीछे,,
    आज इस भीड़ में भी मैं तुझको भुला नहीं पाउँगा।।
    राही (अंजाना)

  • जो ऊँगली पकड़ चलाती है

    जो ऊँगली पकड़ चलाती है,
    जो हर दम प्यार लुटाती है,
    जो हमको सुलाने की खातिर,
    खुद भूखी ही सो जाती है,
    खेल खिलौने कपड़े लत्ते जो हमको दिलवाती है,
    खुद एक ही साड़ी में जो सारा जीवन जीती जाती है,
    अपने सपनों को तज कर जो हमको सपने दिखलाती है,
    कोई और नहीं कोई और नहीं वो बस एक माँ कहलाती है॥
    राही (अंजाना)

  • माँ की दुआ

    माँ हो साथ मेरे तो दुआ भी साथ देती है
    जब तक हाथ सर पे है खता भी साथ देती है

    जाने क्या असर है माँ के हाथो में खुदा जाने
    ममता से खिला दे तो दवा भी साथ देती है

    कुछ भी हो नही सकता भले तूफान हर सू हो
    माँ जब सामने हो तो हवा भी साथ देती है

    फैलेगीं हवाओं में बहारें इस कदर तेरे
    माँ के साथ होने से फ़िजा भी साथ देती है

    रहमत जान ले तू भी ‘लकी’ माँ की दुआओं की
    सर पे हाथ रखते ही कजा भी साथ देती है

  • माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फिर नहीं दोहराउंगी…

    माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फिर नहीं दोहराउंगी

    मैं अपने बेटों को औरत की इज़्ज़त करना सिखाऊंगी

    माँ,मैं तुम्हारी गलतियों को फ़िर नहीं दोहराउंगी

    औरत होने का मतलब
    डरना नहीं
    मैं अपनी बेटियों को सिखाऊंगी

    माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फिर नहीं दोहराउंगी

    मैं अपने बच्चों को आत्म निर्भर बनना सिखाऊंगी

    जीवन का मतलब सिर्फ़ बिताना नहीं
    जीवन अमूल्य हैं, उन्हें समझाऊँगी,

    माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फ़िर नहीं दोहराउंगी

    मैं अपने घर जैसा,
    अपना घर नहीं बनाऊंगी

    माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फ़िर नहीं दोहराउंगी…

    राजनंदिनी रावत

  • माँ

    तू जो होती माँ
    मैं कभी ना रोती माँ

    मैं भी स्कूल में सबके साथ
    तेरे बनाए पराठे खाती..माँ

    सब बच्चो की तरह
    मैं भी ठहाके लगाती..माँ

    तू जो होती माँ
    मैं कभी ना रोती.. माँ

    जब भैय्या मुझे चिढ़ाते
    तुम उसे डाँटती..माँ

    मेरी पढ़ाई के लिए
    पापा से तुम,लड़ जाती..माँ

    तु जो होती माँ
    मैं कभी न रोती माँ

    मेरा बचपन खिल जाता
    तेरा प्यार जो मिल जाता माँ

    तु जो होती माँ
    मैं कभी ना रोती माँ

    ज़िंदगी इतनी दुश्वार ना होती

    अगर तू होती माँ

    मैं कभी ना रोती माँ ।

    राजनंदिनी रावत

  • मां

    मां तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो
    सुख-दुख, खुशी-गम हर परिस्थिति में थामें हाथ

    बिन कुछ कहें ही समझती, मेरे दिल की हर बात

    मां तुम मेरे लिए ईश सम्‍य हो ।।

    धैर्य, संतोष व समय प्रबंधन जैसे

    आत्‍म व जीवन प्रबंधन के गुणों से परिपूर्ण व्‍यक्तित्‍व

    मां तुम तो हो मेरे सुखद भवितव्‍य का मूल प्रतिरुप,

    मां तुम ही मेरी एकमात्र आदर्श हो ।।

    तुम प्‍यार का सागर, तुम भावनाओं की निश्‍चल मूर्ती

    तुमने ही मुझे सिखाया गिरकर संभलना, कभी हार न मानना,

    अपने लक्ष्‍य की ओर बढते रहना,

    मां तुम ही मेरी सबसे पहली गुरु हो ।।

    जब जिंदगी ने किया दोराहे पर मुझे खडा

    आत्‍मविश्‍वास डिगा, मैं लक्ष्‍य पथ से विमुख हो पीछे मुडा

    तुमने मेरा हाथ थाम, मेरी आत्मिक शक्ति को जगाया

    मां तुम ही मेरी सच्‍ची पथ प्रदर्शक हो ।।

    जब अपने जीवन के महत्‍वपूर्ण निर्णय लेने में

    पाता हूं खुद को लाचार

    सही राह चुनने के लिए बस आता हैं मां का ही खयाल

    मां तुम ही मेरी सच्‍ची सलाहकार हो ।।

    जब दुनिया की मृगमरीचिका में खोकर

    अपने दायित्‍वों,संस्‍कार व मूल्‍यों को बिसरा गया

    तुमने मेरे अंतस को चेताकर, मानवीयता को जगाया

    मां तुम ही मेरी आंतरिकशक्ति हो ।।

    जब दुनिया की भीड में भी मैं तनहा था

    बहुत मुश्किल काटना एक-एक लम्‍हा था

    मां तुमने ही मेरे एकाकीपन को दूर किया

    मां तुम ही मेरी सबसे अच्‍छी दोस्‍त हो ।।

    मेरे जीवन की हर उपलब्धि का

    श्रेय तुमको ही जाता हैं

    तुम बिन जीवन की कल्‍पना करना भी मुझे नहीं आता हैं

    मां तुम ही मेरी जीवन शक्ति हो ।

    मां मेरे रक्‍त के कण-कण में हैं बस तेरा ही नाम

    तेरे ही चरणों में हैं मेरे तो चारों धाम ।

  • माँ बाप के नाम

    पैदा कलम से कोई कहानी की जाए,
    फिर जज़्बातों की तर्जुमानी की जाए!

    खिलावे हैं खुद भूखे रहकर बच्चों को
    माँ-बाप के नाम ये जिंदगानी की जाए!

    ग़म से तो हाल ही में ही बरी हुए हम,
    मुब्तिला होके बर्बाद जवानी की जाए!

    सबको आदत हैं बे-वजह हंगामे की,
    कभी हक़ की भी हक़बयानी की जाए।

    ‘तनहा’आईना के सामने लिखे ग़ज़ल,
    ऐसे उसकी खुद की पासबानी की जाए!

    तारिक़ अज़ीम ‘तनहा’

  • माँ का आंचल

    अपने आंचल की छाओं में,
    छिपा लेती है हर दुःख से वोह

    एक दुआ दे दे तो
    काम सारे पूरे हों…

  • मां

    तुम्हारे होने से ही मैं हूं
    मेरे वजूद का मतलब तुमसे है
    मां के चरणों में मेरा जीवन है
    मेरे जीवन का मतलब तुमसे है

  • माँ तेरे प्यार को कैसे लिखूँ

    माँ तेरे प्यार को कैसे लिखूँ,
    प्यारे से दुलार को कैसे लिखूँ,

    सुबह का जगाना और रात लोरी सुनना
    पल पल पूछे खाना खाले जो चाहे वही बनवाले
    फिर बोले घर जल्दी आना देर हो जाए तो पहले बतलाना,

    इस प्यारे से व्यवहार को कैसे लिखूँ
    माँ तेरे प्यार को कैसे लिखूँ

    मेरे कष्ट में तू टूट सी जाती,
    खुद की तकलीफ को झट से छुपाती,
    मुश्किल में तू मुस्काती,
    मेरी जीत में फिर उछल सी जाती

    तेरे इस एहसास को कैसे लिखूँ
    माँ तेरे प्यार को कैसे लिखूँ

    निस्वार्थ प्रेम की परिभाषा तू बख़ूबी सिखलाती है
    मेरे जीवन के सपनों को अपने सपने बतलाती,
    थोड़ा भी मायूस होने पे तू भरपूर जोश हम में भर जाती है
    अपनी दिन भर की मेहनत से तू घर में बहार ला जाती है

    तेरे इस प्यारे से आभार को कैसे लिखूँ
    माँ तेरे प्यार को कैसे लिखूँ

    -मनीष

  • माँ

    मन मन्दिर में जिसकी मूरत
    उसको दुनिया कहती माँ है
    माँ ममता की सच्ची मूरत
    जग में दुख को सहती माँ है ।।

    पुत्र नही तो दुख का मंजर
    पुत्र प्राप्ति पर भी दुख ऊपर
    सुख दुःख के संघर्ष है फिर भी
    प्यार से आंचल फेरे माँ है ।।

    पुत्र दुखी होता है जब भी
    माँ दुख का संज्ञान करे
    मेरा पुत्र है रुठा सायद
    बात का माँ सन्धान करे ।।

    वो तो ममता की है मूरत
    सारा दुख हर लेती है
    कमी हमे हो जो जीवन में
    हमको लाकर देती है ।।

    जन्म लेकर अन्तिम तक वो
    पुत्र का ही संज्ञान करें
    मेरा पुत्र है मेरी ममता
    ममता का गुणगान करें ।।

    पुत्र नही समझे ममता को
    समय के साथ बदलता है
    भूल वो जाता है ममता को
    “अलक” प्यार किसी से करता है।।

    अशोक सिंह आज़मगढ़

  • मां की गोद

    पागल हैं, वे लोग जो कहते हैं कि, मरने के बाद जन्नत मिलती है
    ऐ दोस्तो मां की गोद में फिर एक बार सिर रखकर देखो।

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