माटी मेरी प्रीत की

माटी मेरी प्रीत की पल पल पक्की होती जाये
देख जीत मेरी प्रीत की, तेरा रंग क्यों फीका पड़ता जाये

Comments

3 responses to “माटी मेरी प्रीत की”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    वाह बहुत सुंदर रचना

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

  3. राम नरेशपुरवाला

    वाह

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