मिलन

तुमसे मिलने की ललक..
मेरी इन साँसों को !
एक उम्मीद-औ-आशा
की झलक दे जाती है !!

तेरी बस एक झलक..
उम्मीदों के तप्त मरुस्थल में !
उमंगों की बहार..
अनेकों पुष्प खिला जाती है !!

यूँ तो तुम बसते हो..
मेरे कण कण में !
तेरे दीदार की ख्वाहिश..
नयी प्यास जगा जाती है !!

राज़-ए-दिल तुझसे..
भला कौन छुपा पाया है !
दिल की हर धड़कन..
तेरा अहसास करा जाती है !!

बेख्यालि में भी..
ख्यालों में सूरत तेरी है !
सांसो की तरन्नुम..
“सो-हम” लय में गुनगुनाती है !!

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deovrat – 21.02.2018 ( c)


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By DV

14 Comments

  1. Priya Gupta - March 8, 2018, 5:56 pm

    Nice… specially this line बेख्यालि में भी..
    ख्यालों में सूरत तेरी है !

  2. Yogi Nishad - March 9, 2018, 1:22 pm

    वाहहहहह लाजवाब बेहतरिन

  3. Ritu Soni - March 10, 2018, 11:08 am

    very nice poem

  4. राही अंजाना - July 31, 2018, 11:15 pm

    Waah

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 11, 2019, 10:31 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

  6. राम नरेशपुरवाला - October 4, 2019, 3:31 pm

    वाह

  7. Deovrat Sharma - October 4, 2019, 6:07 pm

    राम नरेश जी शुक्रिया

  8. Abhishek kumar - November 28, 2019, 11:30 am

    Superb

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