मुक्तक 11

किया है खून रिश्तो का , तुम्हे कातिल कहूँ या भ्रम ,
जला कर प्रेम का दीपक , अँधेरा कर दिया कायम .

…atr

Comments

3 responses to “मुक्तक 11”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Wah

  2. Kanchan Dwivedi

    Nice

  3. Satish Pandey

    बहुत खूब

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