मुक्तक 6

बर्बादी किसे दिखेगी हमारी जहाँ में मीर ,
लुटने के बाद ग़म का खज़ाना जो पा लिया ..
मुझको तेरी कमी तो सताती ही है मगर ,
तू दूर जा के खुश है ये सुकून की बात है .

…atr

Comments

3 responses to “मुक्तक 6”

  1. राम नरेशपुरवाला

    वाह

  2. Satish Pandey

    वाह वाह, बहुत खूब

  3. Satish Pandey

    Very nice

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