मेरा राह

मेरे राहों के हमसफर हो तुम,
दोस्त कम हमसफर ज्यादा हो तुम।
संग संग जो तुम मेरे रहते बनकर दीप,
परछाई में साथ निभाते हमसफर हो तुम ।।

✍🏻 महेश गुप्ता जौनपुरी

Published in मुक्तक

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