विराट रूप

विराट रूप

जब रण में अर्जुन घबराया।

जब उसने युद्ध न करने को अपने भय को दिखलाया।

तब परमेश्वर ने कृपा करके उसको विराट रूप दिखलाया ।

जितना दीप्ति अचानक था हरि रूप भयानक था ।

ज्वाल छोड़ते मुख थे उनके और सकल ब्रम्हांड समाया था।

तीन काल घूमते थे जिसमे क्षण क्षण को दिखलाया था।

पांडव विजय थे उसमे , कौरवों को मृत दिखाया था।

इतना तेज था उसमें की सुर्य लोक शरमाया था।

कर में धनुष टंकार लिए वज्र का घोर प्रहार लिए।

सब देव समाहित थे उसमे , सुगन्दीत पुष्पओं का हार लिए।

सब अस्त्रो से सजा हुआ सुदर्शन उंगली समाया था।

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14 Comments

  1. Astrology class - November 7, 2019, 3:31 pm

    Nice

  2. Poonam singh - November 7, 2019, 3:33 pm

    Nice one

  3. राही अंजाना - November 7, 2019, 10:16 pm

    वाह

  4. NIMISHA SINGHAL - November 7, 2019, 11:16 pm

    Wah

  5. देवेश साखरे 'देव' - November 8, 2019, 9:13 am

    सुन्दर

  6. nitu kandera - November 8, 2019, 9:32 am

    Wah

  7. Shivam Tomar - November 8, 2019, 7:37 pm

    Thanks

  8. राही अंजाना - November 8, 2019, 9:53 pm

    Wah

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