ये धरती है वीर बहादुर भगत राज गुरु लालों की,
आजादी की जंग में थे शामिल दीवाने दिलवालों की,
एक माँ से दूर रहकर एक माँ का आँचल रँगने वालों की,
हर मौसम में जो डटे रहे उन चौड़ी छाती वालों की,
सरहद पर बेरंग हुए जो तिरंगे की आन बचाने वालों की,
अंग्रेजी शासन से भारत को मुक्त करने वालों की,
ये धरती है माथे से माटी का तिलक लगाने वालों की,
अपने होंसले के आगे हिम पर्वत को बोना करने वालों की,
ये धरती है………..
राही (अंजाना)

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