वो मुझे कुछ यूँ चाहता था
कि मेरी साँसो से मुझे पहचान लेता था
एक दिन उसके दोस्तों ने पूंछा
क्या है तुम्हारी ख्वाहिशे——
उसने छोटी सी लिस्ट सुनाई
जिसमें पहला नाम भी मेरा था
और आखरी भी——
वो मुझे कुछ यूँ चाहता था—-
मेरे मुँह से निकले अल्फ़ाज
मेरे चेहरे से जान लेता था—‘
वो मुझे कुछ यूँ
Comments
12 responses to “वो मुझे कुछ यूँ”
-
Nice
-

थैंक्स
-
-

Nice
-

धन्यवाद
-
-

Nyc
-

थैंक्स
-
-

Good
-

थैंक्स
-
-

वाह
-

थैंक्स
-
-

Nice poem
-

धन्यवाद
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.