शनासा

नहीं रहा अब इस जहान में मेरा शनासा
कर्ब किसको रो- रोकर सुनाऊँ अपना
शनासा- परिचित, कर्ब-दुख

Comments

9 responses to “शनासा”

  1. सुन्दर रचना

    1. थैंक्स फॉर कमेंट्स

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