सच्चा मित्र

बैरी नहीं वो होता,
जो आईना दिखाता।

एक सच्चा मित्र ही तो,
गलतियां बताता।

जब मित्र गलती पर हो,
दे घर से वो निकाला,
कोई हल बिना निकाले,
परिवार ही हिला दे।

फिर पूछता फिरे सभी से,
क्यू बैरी जग ये सारा ।

खुद ही जवाब होकर,
मांगे जवाब खुदाया।

तब मित्र का कर्तव्य,
सही मार्ग है सुझाना।

परिवार होता जिनका…
अकेले,बिना पूछे ,कोई फैसला नहीं सुनाता।

तब मित्र सोचते हैं,
अब आईना दिखाना,
थोड़ा सबक सिखाना अब हो गया जरूरी ।

कुछ दिन यूहीं गुज़ारो।
कुछ दूरियां बढ़ालो,
शहंशाह से विदा लो।

जिंदगी फिर भी चलेगी,
सांसे तो ना रुकेंगी
दौड़ेंगी बेशक धीरे,
पर चलती तो रहेंगी।
फिर जड़ नहीं हिलेगी।
निमिषा सिंघल

Comments

5 responses to “सच्चा मित्र”

  1. Priya Choudhary

    Nice

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