सबके अन्दर बसता है

मैं सोच ही ना पाता हूँ

कैसे तू यह सब करता है

सबके अन्दर बसता है

सबको ख़ुद में रखता है

 

….. यूई

Comments

2 responses to “सबके अन्दर बसता है”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सुन्दर

  2. Pratima chaudhary

    Nice line

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