समय बदलने लगा तो खेल बदलने लगे,
दोस्त साथ घूमना और बाहर निकलना भूलने लगे,
खिलौने भी बदलने लगे खिलाड़ी भी बदलने लगे,
जो संग साथ लगाते थे मेले खुले आंसमा के निचे,
आज अकेले ही बन्द कमरों में मिलकर वो परिंदे रोने लगे,
जो दिखती थीं महफिले शाम ओ खटियो पर बस्ती में,
आज शहरों में लोग सभी अपनी ही मस्ती में रहने लगे॥
राही (अंजाना)
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