सुनहरी किरण जब मेरी खिड़कियों से झांकती है

सुनहरी किरण जब मेरी खिड़कियों से झांकती हैं
सीमेंट देती हूं पर्दे को मैं भी
खिड़कियों के पट खोल के
स्वागत है आपका कहती हूं
रख देती है मेरे मुंह पर
अपने अदृश्य हाथों को
जैसे कोई मां अपने बच्चे को दुलारती हैं
सुनहरी किरण जब मेरी खिड़कियों से झांकती है
एक पल में दुलराती है मुझको
दूजे पल में शैतानी दिखाती है
मेरे आशियाने की लेती है तलाशी
घर की दीवारों पर छलांग लगाती है
खेलती है साथ में आंख मिचोली
बादलों के पीछे से चुपके से ताकती है
सुनहरी किरण जब मेरी खिड़कियों से झांकता हैं


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11 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - February 11, 2020, 5:13 pm

    Wah

  2. Priya Choudhary - February 11, 2020, 5:15 pm

    थैंक्स

  3. Pragya Shukla - February 11, 2020, 6:49 pm

    Good

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 11, 2020, 8:25 pm

    Nice

  5. Kanchan Dwivedi - February 11, 2020, 8:41 pm

    Good

  6. Anita Mishra - February 13, 2020, 10:00 am

    Good

  7. NIMISHA SINGHAL - February 13, 2020, 12:25 pm

    👌👌👌👌

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