सॉझ को आखिर सुख का सवेरा कब तक लिक्खूं

सॉझ को आखिर सुख का सवेरा कब तक लिक्खूं !

उजियारे को घोर अंधेरा कब तक लिक्खूं !!

चारो तरफ है घोर निराशा फिर भी आशा लिख देता हूं !

सारे सुखों पे दुःख का डेरा कब तक लिक्खूं !!

Comments

3 responses to “सॉझ को आखिर सुख का सवेरा कब तक लिक्खूं”

  1. Ajay Nawal Avatar
    Ajay Nawal

    bahut ache dost

  2. Panna Avatar
    Panna

    nice one 🙂

  3. Satish Pandey

    सारे सुखों पे दुःख का डेरा कब तक लिक्खूं !!
    अतिसुन्दर

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