हमारी मौजूदगी में।

झुक कर उठ जाती थी,
उनकी नज़रें,
हमारी मौजूदगी में।
और अब आलम ऐसा है,
कि उनकी नज़र,
अब उठती ही नहीं।


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12 Comments

  1. Rishi Kumar - September 16, 2020, 1:14 pm

    Very nice

  2. Pragya Shukla - September 16, 2020, 3:08 pm

    Beautiful

  3. Geeta kumari - September 16, 2020, 3:16 pm

    बहुत ख़ूब

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 16, 2020, 4:55 pm

    अतिसुंदर भाव

  5. मोहन सिंह मानुष - September 16, 2020, 11:10 pm

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  6. Pratima chaudhary - September 17, 2020, 8:47 am

    बहुत बहुत आभार

  7. Deep Patel - September 23, 2020, 1:08 pm

    तुम एक नज़र देख लो खुद को मेरी नज़र से

    तुम्हारी नज़रें तलाशेंगी खुद फिर मेरी नज़र को

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