हर रास्ता वहीं पे जाता

क्यों ना!
क्षितिज के पार ….जाल डाल…. खींच ले वह आलौकिक नजारा,
जहां बसे ग्रह नक्षत्रों का खेल …..बना देता हम सबको बेचारा।

जब चाहा जिसे चाहा एक झटके में वो काटा!!
डोर जिससे बंधा था हर जीव … जीव से परमात्मा।
ना उम्र का तकाजा ना बीमारी का ठिकाना,
हंसता खेलता इंसान भी हो जाता प्रभु को प्यारा।

फिर किस लिए बनावट फिर किस लिए दिखावा,
सीधा हो या जटिल हो,
हर रस्ता वही पे जाता।

निमिषा सिंघल


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

10 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 13, 2020, 7:42 am

    Nice

  2. Priya Choudhary - February 13, 2020, 8:16 am

    Good

  3. Anita Mishra - February 13, 2020, 9:59 am

    Good

  4. Anita Mishra - February 13, 2020, 3:51 pm

    Nice

  5. Kanchan Dwivedi - February 13, 2020, 4:33 pm

    क्या बात है जी

Leave a Reply