यादों के भरोसे
कट रही है जिन्दगी
बाकी तो मर ही चुकी थी
प्रज्ञा’ तेरे इन्तज़ार में।
हिंदी वो भाषा है जो
हृदय की गहराईयों से
निकल कर सौंदर्य के सागर में नहाती है
और अभिव्यक्ति का उच्छ्वास करती है।
तुम हो मेरा शब्द सागर मेरे व्याकरण का अर्थ हो तुम।
मेरे जिक्र को हरगिज़ ना समझो पर मेरे मौन को समझने में समर्थ हो तुम।।
बना दी मैने भी एक दुनिया
ईश्वर से प्रेरित होकर…
ख्वाबों की दुनिया…!!
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