हिन्दी गजल- वतन को बचाने चले है |

हिन्दी गजल- वतन को बचाने चले है |
लगा मजहबी आग आज वो वतन जलाने चले है |
भड़का सियासी चिंगारी वो वतन मिटाने चले है |
भरा नहीं दिल उनका फैला दंगा फसाद देश मे |
है कितने हमदर्द उनके लोगो सब दिखाने चले है |
करते बात देशहित हाथ दुशमनों मगर मिलाते है |
लगा देश बिरोधी नारा रोज मजमा लगाने चले है |
जवानो की शहादत पर ओढ़ लेते है खामोशिया |
मौत दुशमनों पीट छाती वो मातम मनाने चले है |
करते राजनीति पर करते काम देशद्रोहियों वाला |
सियासत ऐसी हाथ दुशमनों वो मिलाने चले है |
मंदिर मस्जिद गिरजा गुरुद्वारा से मतलब नहीं |
आए चूनाव सिर माथे चंदन वो चमकाने चले है |
फिक्र अपनी नहीं फिक्र वतन की करता है वो |
रहे भारत सलामत उम्र अपनी वो खपाने चले है |
टुकड़े गैंग या हो टोली गदारों वो डरता ही नहीं |
आवाम समझ भगवान सिर वो झुकाने चले है |
चलना साथ तुम भी चलो पहले दिल मैल दूर करो |
सबका साथ सबका विश्वास वतन वो बचाने चले है |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

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