हिन्दी गजल-संग जो चले होते |

हिन्दी गजल-संग जो चले होते |
दो कदम तुम दो कदम हम संग चले होते |
तन्हा न मै तन्हा न तुम कभी दोनों रहे होते |
याद किया होता गर दिल से कभी तुमने मुझे |
कभी ख्वाबो मे ही सही हम दोनों मिले होते |
सिवा तेरी यादों के पास मेरे कुछ बचा नहीं |
साथ दिया न वक्त वरना इश्क फूल खिले होते |
कास की लौट आते हमारे वो बीते हुये लम्हे |
मै तुम्हारा तुम हमारे अब मीत बन चले होते |
ये मजबूरियाँ ये दूरियाँ खलती बहुत है मुझे |
दिल लगाया न होता न हम तेरे दिलजले होते |
छोड़ चुके हो मेरा साथ मेरे शहर को तुम |
लौट आते तुम मोहब्बते गुल फले फुले होते |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286


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5 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 27, 2020, 7:20 am

    Nice

  2. Priya Choudhary - February 27, 2020, 7:58 am

    Wah👏👏👏

  3. NIMISHA SINGHAL - February 27, 2020, 12:20 pm

    Wahwah

  4. Pragya Shukla - February 27, 2020, 8:20 pm

    Good

  5. Kanchan Dwivedi - March 4, 2020, 10:03 pm

    Good

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