ज़िन्दगी ना थी – 5

ज़िन्दगी ना  थी कुछ हमारी, जैसी तुम्हारी

बाज़ूओं को ना था कोई सहांरा, जैसा तुम्हारा

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नारी वर्णन

मयखाने में साक़ी जैसी दीपक में बाती जैसी नयनो में फैले काजल सी बगिया में अमराई जैसी बरगद की शीतल छाया-सी बसन्त शोभित सुरभी जैसी…

नज़र ..

प्रेम  होता  दिलों  से  है फंसती  नज़र , एक तुम्हारी नज़र , एक हमारी नज़र, जब तुम आई नज़र , जब मैं आया नज़र, फिर…

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