अंतरनाद हो रहा।।

अंतरनाद हो रहा देखो
प्रकृति में चहुं ओर
नित नवीन गुंजन उठे
बादल उठे घनघोर
ढोल मृदंग बज रहे सब
अप्सराएं भी गुणगान करें
राम ने अवध में जन्म लिया
हर्षित है पूरा लोक।

Comments

10 responses to “अंतरनाद हो रहा।।”

  1. राकेश पाठक

    Nice

    1. Pragya

      धन्यवाद आपका बहुत बहुत आभार व्यक्त करते हैं

  2. Praduman Amit

    बहुत ही सुन्दर भाव प्रकट किया है आपने।

    1. Pragya

      बहुत बहुत आभार

  3. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति 

    1. धन्यवाद

  4. Ekta

    बहुत ही सुंदर भाव

    1. Pragya

      धन्यवाद आपका

  5. Amita

    राम जन्म का बड़ा मनोरम वर्णन किया है आपने

    1. Pragya

      धन्यवाद आपका
      बहुत बहुत आभार व्यक्त करते हैं

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