अंधेरा इतना भी नहीं था कि रोशनी में अपनी जगह बना सके,
और रोशनी भी इतनी नहीं थी कि अंधेरे को मिटा सके,
अंधेरा इतना भी नहीं था
Comments
8 responses to “अंधेरा इतना भी नहीं था”
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लाजवाब
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धन्यवाद सर
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अंधेरा कितना भी हो कबतक हमें डराएगी
कभी तो उम्मीदों की किरण आएगी-

बहुत सुंदर सुमन जी
धन्यवाद
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सुंदर
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धन्यवाद सर
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सुन्दर
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धन्यवाद
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