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  1. “भले ही जमाना, तुम्हें कुछ न समझे,मगर हौसले को बनाये ही रखनाचली आंधियां है, धूल उड़ रही है
    आंखों को अपनी बचाये ही रहना”
    बहुत सुंदर कविता है सतीश जी मुसीबत में भी हौसला बनाए रखने का आश्वासन देती हुई बहुत ही प्रेरक रचना.किसी रोते हुए को भी मुस्कान देने वाली बहुत ही प्रेरणा देती हुई पंक्तियां हैं

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