अकेले होने का मतलब हर बार
बस उदास होना ही नहीं होता
हो सकता था मैं भी बरबाद
पास अगर मैं खुद के न होता।
किसीकी कोई चोट
ऐसी भी होती है
जिसका एक निशाँ ही
कईं चोटो से कम नहीं होता।
कुछ गम
सीख देने वाले भी होते हैं
सिर्फ रूलाने खातिर ही
हर गम नहीं होता।
गम किसीके जाने का
कईं बार इतना गहरा होता है
कि वो
आँसुओं के ख़त्म होने पर भी
कम नहीं होता।
लेकिन जिसने
परम–प्रकाश पा लिया हो
उसके लिए किसी भी मुकाम पे
तम नहीं होता।
और वो तो इंसान कईं बार
यूँ ही भ्रम पाले फिरता है
वरना यहां कोई भी इंसान
किसी से कम नहीं होता।
– कुमार बन्टी
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