realism

अपने ही सूरज की रोशनी में

अपने ही सूरज की रोशनी में मोती–सा चमकता औस का कतरा है आज़ वो जो कल तक था अंधेरे में जी रहा।   कितनो की आँखों का तारा है आज़ वो जो कल तक था अज़नबी बनकर जी रहा।   दूसरो के कितने ही कटे जख्मों को  है वो सी रहा लेकिन अपने ग़मों को अभी भी वो खुद ही है पी रहा।     कितनी ही बार जमाने ने उसे गिराया लेकिन वो फिर–फिर उठकर जमाने को ही सँवारने की तैयारी में है जी रहा।   अपने दीया होने का उसने कभी घमण्... »

ख़ुशी क्या है ?

क्या सिर्फ चेहरे पर बनी कुछ लकीरें तय करती हैं ख़ुशी ? या फिर किसीके पूछने पर ये कह देना “मैँ खु़श हूँ” इससे ख़ुशी का पता लग सकता है ?   — KUMAR BUNTY »

क्या लिखूँ ?

दिन–रात लिखूँ हर बात लिखूँ दिल के राज़ लिखूँ मन के साज़ लिखूँ।   अपने वो दिन बेनाम लिखूँ लेकिन नहीं हुआ बदनाम लिखूँ कितना बनकर रहा गुमनाम लिखूँ इतना कुछ पाने पर भी बनकर रहा मैं प्राणी आम लिखूँ।   मन तो मेरा कहता है कि लगातार लिखूँ और दिल भी पुकारता है कि सबके सामने सरेआअम लिखूँ।       कितनों ने दिया साथ और कितनों ने दिखाया खाली हाथ क्या वो भी लिखूँ।   वक़्त केसे पड़ गया कम होते हुए भी मन में समु... »

तू ही बता दे जिंदगी

कुछ खो गया है मेरा या फिर मैं खुद ही लुटा रहा हूँ जिंदगी कहीं चल तू ही बता दे जिंदगी आज़ नहीं तो कल किसी और मोड़ पे सही मुझे कोई जल्दी नहीं लेकिन तुम इतनी भी देर मत करना कि खो चुका हूँ मैं खुद को ही कहीं।                                                                                                                                                                                         —̵... »

SHAYARI

  तुझसे  मिलने का  मुझे कोई  आसार भी नहीं दिखता। लेकिन इंतज़ार तेरा करते–करते मैं फिर भी नहीं थकता। »

SHAYARI

साथ देने में मेरा जिंदगी के दुखों का कोई सानी नहीं असल में तो दुख के बिना सुख का भी कोई मानी नहीं।                                                                           मानी= अर्थ »

SHAYARI

SHAYARI

तंग नहीं करता हूँ मैँ उसे आज़कल ये बात भी तो  उसे  तंग करती है । »

SHAYARI

अंत तो तेरा भी वही होगा अंत मेरा भी वही होगा लेकिन फर्क इस बात से पड़ेगा कि किसकी जगह लेने वाला कोई नहीं होगा। »

SHAYARI

  साथी तो मेरे वो भी खूब रहे जो लगातार मेरी तनकीद करते रहे लेकिन अमल–अंगेज़ तो मेरे वो बखूबी रहे जो लगातार मुझसे कोई उम्मीद करते रहे। तनकीद=आलोचना अमल–अंगेज़ = उत्प्रेरक   »

SHAYARI

  जिंदगी की जंग  मुझसे जारी है कभी मैं उसपे तो कभी वो मुझपे भारी है। »

SHAYRI

  ज्ञानी को होता है एकांत पसंद लेकिन किसीसे मिलने की तलब मूर्खता का प्रमाण तो नहीं होता कम से कम प्यार में तो नहीं होता। »

SHAYRI

क्या नाम है उसका कौन से देश से है वो असल मे दिल देने वाला तो सोचता ही नहीं इन सब बातों को। »

SHAYARI

है मुझे एक मर्ज़ लेकिन मुझे खौफ नहीं क्योंकि है वो मर्ज़ बेखौफी का ही। »

SHAYARI

SHAYARI

प्रेम के बारे में क्या बात करूँ प्रेम की अभिव्यक्ति शब्दों मे कहां होती है मिले न सबको प्रेम वो अलग बात है लेकिन प्रेम की चाह तो हरेक दिल में होती है। »

कोई क्या करे तब….

वक़्ता भी क्या बोले जब कोई उसे ध्यान से सुनने को तैयार नहीं।   लेखक भी क्यों लिखे जब कोई कुछ दिल से पढ़ने को तैयार नहीं।   गायक भी कैसे गाए जब कोई सुरों की कदर करने को तैयार नहीं।   आशिक़ भी अपने दिल को क्यों खोले जब उसका प्यार उसे समझने को तैयार नहीं।   दर्द में भी कोई क्यों चींखे जब कोई उसकी चींख सुनने को तैयार नहीं।   गम में भी कोई कैसे रोए किसीके आगे जब कोई उसका गम समझने को ही तैयार नहीं।     को... »

सीखता रहता हूँ मैं

न जाने क्या–क्या चीजें लिखता रहता हूँ मैं वक़्त की इस महँगाई में खुद के ही हाथों खुद को बिकता रहता हूँ मैं सब से दूर होकर पता नहीं किसके करीब खुद को खींचता रहता हूँ मैं कईं बार तो इसी वज़ह से खुद पे ही झींकता रहता हूँ मैं लेकिन आखिर में चाहे हार जाऊँ या जीत जाऊँ फिर भी कुछ न कुछ सीखता रहता हूँ मैं।                                                                         –        कुमा... »

अधूरापन ये मेरा

अधूरापन ये मेरा क्या पता मेरे भीतर कोई आग जला दे और फिर कभी मेरे भीतर कोई  कामयाब सूरज़ उगा दे।                                       –कुमार बन्टी   »

कौन मिलेगा कहां

कौन जानता है कि कौन मिलेगा कहां देखौं न मैं तो हूँ यहां और तुम हो न जाने कहां लेकिन तुम मिल रहे हो मुझसे पढ़कर मेरी लिखी जुबां।                                  – कुमार बन्टी   »

काबिल सदा

बातें दिल की बयां करना आसां नहीं इतना लेकिन अपनी सदा को इतना काबिल तो जरूरी है बनाना कि डर से भी कभी न पड़े डरना।                                                                                                                                                   सदा= आवाज़ – कुमार बन्टी »

कोशिश की राह

कोशिश की राह

नहीं हारनी है हिम्मत जब तक ये साँस हैं क्योंकि मुझे उम्मीद की चाह से ज्यादा कोशिश की राह पे विश्वाश है।                                         –   कुमार बन्टी »

दिन और रात का सपना

दिन में देखा सपना रात को देखा सपना रात का जब टूटा सपना दिन में जगा हुआ पाया लेकिन दिन का जब टूटा सपना रात में भी सो न पाया।                                     – कुमार बन्टी   »

धागे-मोती

मोती को धागे से और धागे को मोती से जब तक होता नहीं प्यार तब तक उनकी नहीं बनती कोई विशिष्ट पहचान।    मोती=शब्द  धागे=विचार                                   – कुमार बन्टी   »

दिन और रात का सपना

दिन में देखा सपना रात को देखा सपना रात का जब टूटा सपना दिन में जगा हुआ पाया लेकिन रात का जब टूटा सपना दिन में भी सो न पाया।                                               – कुमार बन्टी   »

टिकते वाले रिश्ते

यूँ तो रिश्ते रोज़ ही बनते हैं इस जहां में कुछ टूट जाते हैं कुछ बिक भी जाते हैं लेकर बहाने तरह–तरह के लेकिन टिकते हैं रिश्ते वो ही जिन रिश्‍तों में दोनो पक्षों ने वफा के अलावा और कोई माँग कभी की ही नहीं।                                                         – कुमार बन्टी »

जिसको जरूरत होती है….

जिसको जरूरत होती है वही साथ चलता है बिन जरूरत वाला तो बस तनक़ीद करने को ही मिलता है।   अपना मतलब न सोचे दूसरे की मदद करते वक़्त आज़ इस दुनियाँ में ऐसा इंसान कम मिलता है।   जो दूर से दिखाती हैं निगाहें पास जाकर छानने पर वही मंजर हर बार कब मिलता है।   बड़ी–बड़ी नावें पैदा करती है दरिया में बहुत भारी हलकम लेकिन अगर डूब जाएँ वें कभी तो उनका नामो–निशान कहां मिलता है।   खुद–ब–खुद पा... »

खुद को खोने के डर में

खुद को खोने के डर में

भीड़ भरी इस तन्हाई में जीना एक अलग नज़रिए के साथ कितना जरुरी बन गया दिन–ब–दिन बदलता यहां हर मुकाम मुझे ये जाहिर कर गया।   शोर भरे सन्नाटे में कैसे मैं ढ़ल गाया ये तो बस मैं ही जानता हूँ लेकिन खुद को खोने के डर में इस भीड़ भरी तन्हाई में जब से मैं खुद से मिल गया तब से मैं खुद को बड़ा खुशनसीब मानता हूँ।                                                          –   कुमार बन्टी   »

खुली किताब नहीं

खुली किताब नहीं

एक ही झटके में सबकुछ समझ जाओ तुम मेरा जीवन ऐसी कोई खुली किताब नहीं राह हासिल करने को गंदी नाली को स्वीकारले ऐसा ये कोई बेवकूफ आब नहीं।                                                                        -कुमार बन्टी »

अकेले होने का मतलब

अकेले होने का मतलब हर बार बस उदास होना ही  नहीं होता हो सकता था  मैं  भी  बरबाद पास अगर मैं  खुद के न होता।   किसीकी कोई चोट ऐसी भी होती है जिसका एक निशाँ ही कईं चोटो से कम नहीं होता।   कुछ गम सीख देने वाले भी होते हैं सिर्फ रूलाने खातिर ही हर गम नहीं होता।   गम किसीके जाने का कईं बार इतना गहरा होता है कि वो आँसुओं के ख़त्म होने पर भी कम नहीं होता।   लेकिन जिसने परम–प्रकाश पा लिया हो उसके लिए... »

कुछ पल

कुछ पल

कुछ पल बन जाते हैं सब कुछ।   कुछ पल कह देते हैं खुद ही कुछ।   कुछ पल छोड़ते नहीं संग में कुछ।   कुछ पल जिनका मिलता नहीं किसीकी को भी कोई भी हल।   कुछ पल यूँ ही जाते हैं ढ़ल।   कुछ पल टिकते नहीं कुछ भी पल।   कुछ पल रहते वहीं सदा आज़ और कल।   कुछ पल खो जाते हैं कहीं हो जाते हैं गुम बनकर सबसे हसीं पल।   कुछ पल रूलाते हैं बहुत जब याद आ जाएँ किसी पल।   कुछ पल देते हैं सकून अगर मिल जाएँ कुछ ही पल।   कुछ ... »

सफाई-अभियान

कितनी ही बार हमारे college में NSS के तहत Cleanliness drive का प्रोग्राम चलाया गया और हाँ कुछ दिनों पहले ही हमारे PM मोदी जी ने भी स्वच्छता को लेकर देश भर में सफाई–अभियान चलाया College में NSS Volunteers ने खूब हो–हल्ला मचाया और देश भर में भी जगह–जगह पर लोगों ने खूब जोर लगाया…..,   और क्या खूब नज़ारा साफ–सफाई का मेंने यहां और वहां का पाया….,   यहां तो सफाई का करतब केवल NSS क... »

कानून के कुछ रखवाले

कानून के कुछ रखवाले खूब ख्याल रखते हैं कानून का खूब रक्षा करते हैं कानून की खास नज़र रखते हैं इस बात की कि कहीं ये कानून “न्याय” का साथ तो नहीं दे रहा इस तरह का कोई घोर “अन्याय” तो नहीं हो रहा    दरअसल “न्याय” के मायने उनके लिये कुछ अलग ही होते हैं एक अलग ही “न्याय की किताब” वें अपने तकिये तले रखकर सोतें हैं   ये रखवाले इतने मेहनती होते हैं कि सिपाही बनने खातिर कुछ भी करने को तैयार रहते हैं यहां तक... »

किस खतरनाक मंज़िल की तरफ

किसीकी मज़बूरी का उपयोग क्या खूब ये ज़माना कर रहा है किस खतरनाक मंज़िल की तरफ इंसान अब बढ़ रहा है।   संतुष्टि का मतलब स्वार्थ तक ही सीमित रह गया लगन वाला हुनर अब तो बस नौकरी पाने का लालच बनकर रह गया।   मज़बूरी में ही हो रही हैं कईयों की डिग्रियां कईं जगह तो हो भी रही है इन डिग्रियों की बिक्रीयाँ।   मान–सम्मान का मतलब भी अब केवल दबदबा कायम करने तक ही सीमित रह गया औरो की क्या कहूँ मैं खुद भी न जाने... »

SHAYRI

बड़े से बड़े मुकाम में भी  कोई बल नहीं। अगर जिंदगी में सकून का कोई पल नहीं। »

SHAYRI

जग में सारा का सारा ज्ञान लिखा हुआ कहां मिलता है। ज्यादातर  ज्ञान तो  विचारों  में ही  छिपा हुआ मिलता है। »

रब  तो  वाकई  सबके  दिलों  में……..

रब  तो  वाकई   सबके  दिलों   में  बसता  सम  है। लेकिन  उसे  पहचानने  वाला  इंसान  बड़ा कम है।   तुम  मेरे  चेहरे  की   इस  मुस्कान  पे   मत  जाओ इसके  पीछे  छिपा  न  जाने  कितना  बड़ा  गम  है।   चाहे  अपना   चाहे   पराया   मतलब  अगर  न   हो तो   किसीके   मरने  का  भी   किसे   यहां  गम  है।   आधुनिक तरक्की को तरक्की कहना मुनासिफ नहीं अरे इस रोशनी की आड़ में छिपा बड़ा गहरा तम है।   ये  तलब  तब  बन  ... »

वक़्त की हवा

वक़्त की हवा

काश दुनियाँ में ऐसी भी कोई गलती हो जिसे करने पर भी जिंदगी बेफिक्र चलती हो।   ऐसा जहां बनाने की कोशिश में हूँ जहाँ इंसानियत सिर्फ रब से डरती हो।   अरे वक़्त की उस मार से क्या डरना जो गलतफहमी को दूर करती हो।   ऐसी दौलत का मुझे क्या करना जो मुझे खुद से ही दूर करती हो।   प्रेम की परिभाषा किसी घड़े का पानी नहीं दुनियाँ भले ही ऐसा समझती हो।   वें स्कूल कैसे जाएंगे जिन्हें पेटभर रोटी भी कभी–कभार मिलत... »

मेरे घर में भी मुझे  पहचानने वाला ………..

मेरे घर में भी मुझे  पहचानने वाला ………..

मेरे घर में भी मुझे  पहचानने वाला बस एक शक्स हमेशा रहता है। जब मैं देखूं उसे  वो भी  आईने से  मुझे  बस देखता रहता है।   यहां इस खु़शहाली में अमीरों को नींद बस ठंडी हवा में आती है लेकिन गरीब यहां का  जीवन–भर  अपना तन  सेंकता रहता है।   किसीको तो  प्यारा  है  अपना  इमान  अपनी जान  से  भी  ज्यादा और  कोई  तो  यहां  बस  चंद पैसों खातिर  इसे  बेचता  रहता है।   अपने ज़ज़्बे के  ज़ोर से  कर  देता  है ... »

CRY FOR SMILE

God makes us cry So that we can realize The value of smile.., »

SHAYRI

है मुझे एक मर्ज़ लेकिन मुझे खौफ नहीं क्योंकि है वो मर्ज़ बेखौफी का ही। »

मंजिल का नज़ारा तो…………..

मंजिल का नज़ारा तो…………..

 मंजिल का नज़ारा तो अपनी पालकों तले कम ही बीता है। हमारा ज्यादा वक़्त तो बस  सफर के बहाने ही  बीता है।   किसीके  दिल  में  किसीके  खातिर  प्यार  है  कितना इस  उंचाई  को  नापने  खातिर  कहां  कोई  फीता है।   वक़्त  की  रफ्तार  को  कोई  लगातार  चुनौती दे सके क्या  इस  दुनियाँ  में  कहीं  ऐसा भी  कोई  चीता है।   वो पुराने दिन  पुरानी बातें सिर्फ इतिहास में ही रह गई इस  जमाने  में  तुम्हारे  खातिर  कहां  ... »

SHAYRI

उतार–चढ़ाव तो  इस जिंदगी में  हमेशा चलतें ही रहेंगें। दुश्वार पल तो क्या मुकम्मल मुकाम भी सदा नहीं रहेंगें। »

अज़ीब संपनता

 क्या अज़ीब संपनता है इस देश की क्या खूब साधनता है यहां की किसी के यहां तो रोज़ कोई नया पकवान बनता है और कहीं तो रोज़ कोई भूखा ही मरता है ये असमानता भी क्या खूब बन पड़ी है जो अलग–अलग जगहों पर भी समान रूप से खड़ी है।   हम खेतों में इतना उत्पाद उगाने का दावा करते हैं कि विदेशों में भी उसे भेजने का वादा करते है लेकिन मिटा पा रहे हम अपने ही देश के कितने ही गरीबों के  भूखे पेट की भूख क्या इस बात पर ... »

तार के टूटने का मतलब

 तार के टूटने का मतलब सितार टूटना नहीं होता लेकिन सिर्फ जिंदा रहना ही जीवन का इस्तेदाद नहीं होता।                                                    (इस्तेदाद= योग्यता, दक्षता)   जनसंख्या रोज़ बढ़ रही है धरती अब छोटी पड़ रही है लेकिन हर कोई यहां मनवता से भरा इंसान नहीं होता।   मुजरिम भी कहां जुर्म करने से बाज़ आता है जब तक वो कहीं गिरफ्तार नहीं होता।     दुनियाँ का चलन अब इतना बिगड़ गया है कि एक भाई... »

प्यार जिससे करते हैं हम

प्यार जिससे करते हैं हम

 प्यार जिससे करते हैं हम छुपाते भी उसीसे हैं बात जिससे कर पाते नहीं हम हमारी सब बातें भी उसीसे हैं।   मिले चाहे दर्द ही हमें हर बार लेकिन प्यार की ख्वाहिशों में हमारी सब उम्मीदजातें भी उसीसे हैं।   दिखावा कर लेते हैं हम उससे नाराज होने का लेकिन पीछे हम फिर भी आते–जातें उसीके है।   इतने बरसों की पढ़ाई में आजतक किसी टीचर ने नहीं सुनाई लेकिन आजकल ख़ुशी–ख़ुशी हम डांट खातें भी उसीसे हैं।   बा... »

उसकी तस्वीर

  बोलने वाले की हर बात में मिठास होती है अगर सुनने वाले में सुनने खातिर प्यास होती है।   उसकी तस्वीर निहारके ऐसा लगता है मानो उससे रोज़ मेरी मुलाकात होती है।   ये बात सुनने में बहुत अटपटी लगेगी लेकिन सच है कि मेरी खुशी और गम दोनो का कारण उसकी याद होती है।     एक बात बहुत चुभती है मुझे गुस्सा भी आता है कि मेरी छुट्टियों के दिनों में ही उसकी जरूरी क्लास होती है।   तभी तो यारों उससे मिले बगैर अरसा बीत... »

EMOTIONS

EMOTIONS

Emotions   Emotions are only emotions And emotions are everything   Emotions are universal But emotions are unique also   Emotions can’t be denied But all emotions are not good   Emotions exists everywhere But real emotions are rare   Emotions make you fool But also make you cool     Some emotions give you best taste But some make your life “a waste’’   Some emotions help life to embrace But somet... »

        ज्यादा नहीं मुझे तो बस………..

        ज्यादा नहीं मुझे तो बस………..

   ज्यादा नहीं मुझे तो बस एक  सच्चा इंसान  बना दे तूँ । एक बार नहीं चाहे हर बार सच में हर बार बना दे तूँ।   आसमां  छूने की ख्वाहिश  मेरी नहीं  मन नहीं मेरा मुझे  तो  बस  सही  दिशा  में  उड़ना सिखा दे तूँ।   गलत गति से  गलत राह पे दौड़ना  मैं नहीं चाहता मुझे  तो  सही  राह  पे  बस  चलना  सिखा दे तूँ।   सैंकड़ों बरसों के कतरे जीकर भी मेर मन नहीं भरेगा मुझे तो बस  आज़ का पूरा दिन  जीना सिखा दे तूँ।   ल... »

जिंदगी  में   मेरी   एक  अपनापन है  आज़कल….

जिंदगी  में   मेरी   एक  अपनापन है  आज़कल….

   जिंदगी  में   मेरी   एक  अपनापन है  आज़कल जेब में भले ही गोपाल ठन–ठन है  आज़कल।   साथ   देने  को   कोई  दूसरा  साथ में नहीं बस  अपना बेचारा  साफ मन है आज़कल।   तुम    जब   सुनोगे   तभी   तो  जानोगे     कि मेरी   बात  में  कितना   वज़न  है  आज़कल।   मरने  से पहले   ही   मौत   को  देखने  के   बाद जिंदगी को जिंदा कर रहा जीवन है आज़कल।   बेफिक्र  ज़माने  की  करतूतें ‘बंदा’  बता  तो दे लेकिन फिक्र उस... »