अपने ही सूरज की रोशनी में मोती–सा चमकता औस का कतरा है आज़ वो जो कल तक था अंधेरे में जी रहा।   कितनो की आँखों का तारा है आज़ वो जो कल तक था […]

क्या सिर्फ चेहरे पर बनी कुछ लकीरें तय करती हैं ख़ुशी ? या फिर किसीके पूछने पर ये कह देना “मैँ खु़श हूँ” इससे ख़ुशी का पता लग सकता है ?   — KUMAR BUNTY

दिन–रात लिखूँ हर बात लिखूँ दिल के राज़ लिखूँ मन के साज़ लिखूँ।   अपने वो दिन बेनाम लिखूँ लेकिन नहीं हुआ बदनाम लिखूँ कितना बनकर रहा गुमनाम लिखूँ इतना कुछ पाने पर भी बनकर […]

कुछ खो गया है मेरा या फिर मैं खुद ही लुटा रहा हूँ जिंदगी कहीं चल तू ही बता दे जिंदगी आज़ नहीं तो कल किसी और मोड़ पे सही मुझे कोई जल्दी नहीं लेकिन […]

साथ देने में मेरा जिंदगी के दुखों का कोई सानी नहीं असल में तो दुख के बिना सुख का भी कोई मानी नहीं।                                                                           मानी= अर्थ

  साथी तो मेरे वो भी खूब रहे जो लगातार मेरी तनकीद करते रहे लेकिन अमल–अंगेज़ तो मेरे वो बखूबी रहे जो लगातार मुझसे कोई उम्मीद करते रहे। तनकीद=आलोचना अमल–अंगेज़ = उत्प्रेरक  

प्रेम के बारे में क्या बात करूँ प्रेम की अभिव्यक्ति शब्दों मे कहां होती है मिले न सबको प्रेम वो अलग बात है लेकिन प्रेम की चाह तो हरेक दिल में होती है।

वक़्ता भी क्या बोले जब कोई उसे ध्यान से सुनने को तैयार नहीं।   लेखक भी क्यों लिखे जब कोई कुछ दिल से पढ़ने को तैयार नहीं।   गायक भी कैसे गाए जब कोई सुरों […]

न जाने क्या–क्या चीजें लिखता रहता हूँ मैं वक़्त की इस महँगाई में खुद के ही हाथों खुद को बिकता रहता हूँ मैं सब से दूर होकर पता नहीं किसके करीब खुद को खींचता रहता […]

अधूरापन ये मेरा क्या पता मेरे भीतर कोई आग जला दे और फिर कभी मेरे भीतर कोई  कामयाब सूरज़ उगा दे।                                       –कुमार बन्टी  

कौन जानता है कि कौन मिलेगा कहां देखौं न मैं तो हूँ यहां और तुम हो न जाने कहां लेकिन तुम मिल रहे हो मुझसे पढ़कर मेरी लिखी जुबां।                                  – कुमार बन्टी  

बातें दिल की बयां करना आसां नहीं इतना लेकिन अपनी सदा को इतना काबिल तो जरूरी है बनाना कि डर से भी कभी न पड़े डरना।                                                                                                                                                   सदा= आवाज़ – कुमार बन्टी

नहीं हारनी है हिम्मत जब तक ये साँस हैं क्योंकि मुझे उम्मीद की चाह से ज्यादा कोशिश की राह पे विश्वाश है।                                         –   कुमार बन्टी

दिन में देखा सपना रात को देखा सपना रात का जब टूटा सपना दिन में जगा हुआ पाया लेकिन दिन का जब टूटा सपना रात में भी सो न पाया।                                     – कुमार […]

मोती को धागे से और धागे को मोती से जब तक होता नहीं प्यार तब तक उनकी नहीं बनती कोई विशिष्ट पहचान।    मोती=शब्द  धागे=विचार                                   – कुमार बन्टी  

दिन में देखा सपना रात को देखा सपना रात का जब टूटा सपना दिन में जगा हुआ पाया लेकिन रात का जब टूटा सपना दिन में भी सो न पाया।                                               – कुमार […]

यूँ तो रिश्ते रोज़ ही बनते हैं इस जहां में कुछ टूट जाते हैं कुछ बिक भी जाते हैं लेकर बहाने तरह–तरह के लेकिन टिकते हैं रिश्ते वो ही जिन रिश्‍तों में दोनो पक्षों ने […]

जिसको जरूरत होती है वही साथ चलता है बिन जरूरत वाला तो बस तनक़ीद करने को ही मिलता है।   अपना मतलब न सोचे दूसरे की मदद करते वक़्त आज़ इस दुनियाँ में ऐसा इंसान […]

भीड़ भरी इस तन्हाई में जीना एक अलग नज़रिए के साथ कितना जरुरी बन गया दिन–ब–दिन बदलता यहां हर मुकाम मुझे ये जाहिर कर गया।   शोर भरे सन्नाटे में कैसे मैं ढ़ल गाया ये […]

एक ही झटके में सबकुछ समझ जाओ तुम मेरा जीवन ऐसी कोई खुली किताब नहीं राह हासिल करने को गंदी नाली को स्वीकारले ऐसा ये कोई बेवकूफ आब नहीं।                                                                        -कुमार बन्टी

अकेले होने का मतलब हर बार बस उदास होना ही  नहीं होता हो सकता था  मैं  भी  बरबाद पास अगर मैं  खुद के न होता।   किसीकी कोई चोट ऐसी भी होती है जिसका एक […]

कितनी ही बार हमारे college में NSS के तहत Cleanliness drive का प्रोग्राम चलाया गया और हाँ कुछ दिनों पहले ही हमारे PM मोदी जी ने भी स्वच्छता को लेकर देश भर में सफाई–अभियान चलाया […]

कानून के कुछ रखवाले खूब ख्याल रखते हैं कानून का खूब रक्षा करते हैं कानून की खास नज़र रखते हैं इस बात की कि कहीं ये कानून “न्याय” का साथ तो नहीं दे रहा इस […]

किसीकी मज़बूरी का उपयोग क्या खूब ये ज़माना कर रहा है किस खतरनाक मंज़िल की तरफ इंसान अब बढ़ रहा है।   संतुष्टि का मतलब स्वार्थ तक ही सीमित रह गया लगन वाला हुनर अब […]

रब  तो  वाकई   सबके  दिलों   में  बसता  सम  है। लेकिन  उसे  पहचानने  वाला  इंसान  बड़ा कम है।   तुम  मेरे  चेहरे  की   इस  मुस्कान  पे   मत  जाओ इसके  पीछे  छिपा  न  जाने  कितना  बड़ा  गम […]

काश दुनियाँ में ऐसी भी कोई गलती हो जिसे करने पर भी जिंदगी बेफिक्र चलती हो।   ऐसा जहां बनाने की कोशिश में हूँ जहाँ इंसानियत सिर्फ रब से डरती हो।   अरे वक़्त की […]

मेरे घर में भी मुझे  पहचानने वाला बस एक शक्स हमेशा रहता है। जब मैं देखूं उसे  वो भी  आईने से  मुझे  बस देखता रहता है।   यहां इस खु़शहाली में अमीरों को नींद बस ठंडी […]

 मंजिल का नज़ारा तो अपनी पालकों तले कम ही बीता है। हमारा ज्यादा वक़्त तो बस  सफर के बहाने ही  बीता है।   किसीके  दिल  में  किसीके  खातिर  प्यार  है  कितना इस  उंचाई  को  नापने […]

 क्या अज़ीब संपनता है इस देश की क्या खूब साधनता है यहां की किसी के यहां तो रोज़ कोई नया पकवान बनता है और कहीं तो रोज़ कोई भूखा ही मरता है ये असमानता भी […]

 तार के टूटने का मतलब सितार टूटना नहीं होता लेकिन सिर्फ जिंदा रहना ही जीवन का इस्तेदाद नहीं होता।                                                    (इस्तेदाद= योग्यता, दक्षता)   जनसंख्या रोज़ बढ़ रही है धरती अब छोटी पड़ रही […]

 प्यार जिससे करते हैं हम छुपाते भी उसीसे हैं बात जिससे कर पाते नहीं हम हमारी सब बातें भी उसीसे हैं।   मिले चाहे दर्द ही हमें हर बार लेकिन प्यार की ख्वाहिशों में हमारी […]

  बोलने वाले की हर बात में मिठास होती है अगर सुनने वाले में सुनने खातिर प्यास होती है।   उसकी तस्वीर निहारके ऐसा लगता है मानो उससे रोज़ मेरी मुलाकात होती है।   ये […]

   जिंदगी  में   मेरी   एक  अपनापन है  आज़कल जेब में भले ही गोपाल ठन–ठन है  आज़कल।   साथ   देने  को   कोई  दूसरा  साथ में नहीं बस  अपना बेचारा  साफ मन है आज़कल।   तुम    जब […]