अच्छा लगा

आज धरा से मिला आकाश ,तो अच्छा लगा।
नन्हीं – नन्हीं बूंदों से हरी हो गई घास ,तो अच्छा लगा।
तल्ख़ हो जाए ,कुछ बातों से जब दिल,
कोई दे जाए बातों की मिठास , तो अच्छा लगा।
यूं ही तो कोई किसी की परवाह नहीं करता,
कोई दिलाए “ख़ास” का एहसास, तो अच्छा लगा ।

Comments

20 responses to “अच्छा लगा”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बेहतरीन

    1. बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  2. आपकी कविता में साहित्यिक स्तरता का चरम बिंदु है। संतुलित पंक्तियाँ, सुरम्य काव्य, इस प्रतिभा को सैल्यूट

    1. इस सुन्दर समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका सतीश जी 🙏 आपका स्नेह और प्रेरणा मिलती रहे। बहुत बहुत आभार।

      1. आपकी कविताएं वास्तव में बेहतरीन हैं

  3. सुन्दर प्रस्तुति

    1. धन्यवाद जी 🙏

  4. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद सुमन जी 🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏

    1. Geeta kumari

      🙂🙏🙏

  5. Devi Kamla

    लाजवाब कविता

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏

  6. Piyush Joshi

    बेहतरीन

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद पीयूष जी 🙏

  7. Chandra Pandey

    Nice poem geeta ji

    1. Geeta kumari

      Thank you very much for your lovely complement chandra mam🙏

Leave a Reply

New Report

Close