अच्छे लगते हो मुझको तुम।
जब झांकते हो इन आंखों में,
गिर पड़ते गहरे सागर में,
हम शोखी से भर जाते हैं ।
अच्छे लगते हो मुझको तुम।
जब हंसी ठिठोली करते हो,
मुझे देख के आहें भरते हो,
आंखों में शरारत भरते हो।
अच्छे लगते हो मुझको तुम।
जब यूहीं बुद्धू से बन जाते हो,
चलते फिरते टकराते हो,
नाटक करते घबराने का
आहे भर प्यार जताते हो।
अच्छे लगते हो मुझको तुम
जब पूछते हो मेरा हाथ पकड़,
मुझे प्यार करोगी जानेमन?
मेरे ना कहने पर बहते
तेरे नीर नैन,
मेरे हां कहने पर
रोते -हंसते
नैन कमल।
अच्छे लगते हैं
मुझको तेरे तीर नैन।
मैं हंस कर कहती
हां!
जानम
बस एक जन्म नहीं जन्म- जन्म ।
रोते- हंसते से गाते तुम,
वह नीर नैन छलकाते तुम,
वह मुझ पर प्यार लुटाते तुम,
अच्छे लगते हो जानम तुम।
निमिषा सिंघल
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