अतीत के फफोले
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जीवन मेरा उलझा-उलझा
सुलझी लट बालों की
मैंने ना देखा सुंदर उपवन
ना देखी प्रेम की सरिता निर्मल
भूलवश मैं पड़ गई प्रेम के
मायाजाल में
सोंचा था मिलेगा सुख और
जीवन में खिलेेंगे सुंदर पुष्प
पर हार ही हार मिली
जो भी जीवन में आया उससे केवल पीर मिली
अतीत के फलोले आज फूटने लगे हैं
जब बिछड़े हुए लोग फिर से मिलने लगे हैं..
“अतीत के फफोले”
Comments
5 responses to ““अतीत के फफोले””
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हृदय स्पर्शी पंक्तियां
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धन्यवाद
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खूबसूरत रचना
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Tq
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बहुत खूब
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