“अतीत के फफोले”

अतीत के फफोले
***************
जीवन मेरा उलझा-उलझा
सुलझी लट बालों की
मैंने ना देखा सुंदर उपवन
ना देखी प्रेम की सरिता निर्मल
भूलवश मैं पड़ गई प्रेम के
मायाजाल में
सोंचा था मिलेगा सुख और
जीवन में खिलेेंगे सुंदर पुष्प
पर हार ही हार मिली
जो भी जीवन में आया उससे केवल पीर मिली
अतीत के फलोले आज फूटने लगे हैं
जब बिछड़े हुए लोग फिर से मिलने लगे हैं..

Comments

5 responses to ““अतीत के फफोले””

  1. Geeta kumari

    हृदय स्पर्शी पंक्तियां

  2. Virendra sen Avatar
    Virendra sen

    खूबसूरत रचना

Leave a Reply

New Report

Close