अधूरी सी हो गई है ज़िन्दगी,
अधूरा सा हो गया संसार है।
पूरी ना हो पाई कुछ अभिलाषा,
अधूरा सा रह गया प्यार है।
अभी दर्द में बहुत हूँ,
थोड़ा समय लगेगा मुस्काने में।
दर्द की नगरी से वापस,
समय लगेगा आने में।
थोड़ा हाथ बढ़ाना तुम भी,
मुझको वापस लाने में।
थोड़ा समय लगेगा मुझको,
फिर से गाना गाने में।
फुल मुरझा जाए जब दिल का,
एकाएक नहीं खिलता ।
सच ही कहा है एक शायर ने,
कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता,
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमान नहीं मिलता॥
________✍गीता
अधूरी सी ज़िन्दगी
Comments
2 responses to “अधूरी सी ज़िन्दगी”
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बहुत सुंदर पंक्तियाँ। यूँ ही निरन्तर काव्य सृजन होता रहे। कलम निर्बाध चलती रहे।
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आभार सतीश जी
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