अब कि बार दिवाली में….
देश का पैसा देश में रखना
खर्चा मत करना चाइना की लाईट पर
तन मन को प्रशन्नचित रखना
कदम से कदम मिलाकर चलना
मिट्टी के दीपक जलाना
अब कि बार दिवाली में…
शुध्द वातावरण शुध्द मन को रखना
भेद भाव जाति पात से दुर रहना
राष्ट्रहित के लिए काम करना
गरीब को भी गरीबी का इनाम मिले
मिट्टी के दीपक जलाना
अब कि बार दिवाली में…..
मिट्टी के दिए से बरसाती किड़े मर जाते हैं
देश का पैसा देश में रहता
गरीब का दिवाली भी मन जाता हैं
हो राष्ट्र भक्त देश प्रेमी तो
मिट्टी के दिपक जलाना
अब कि बार दिवाली में…..
कला के प्रति समर्पित रहना
परम्परा को जिवन्त रखना
गरीबो को ना रोश दिखाना पैसे की परछाई का
भाईचारे के लिए दिपक खरिदना
मिट्टी का दीपक जलाना
अब कि बार दिवाली में……
आने वाली पीढी को
मिट्टी से लगाव सिखना
देश में रहकर देश से ना करना गद्दारी तुम
मिल जुल कर करे प्यार सभी से
मिट्टी का दिपक जलाना
अब कि बार दिवाली में….
महेश गुप्ता जौनपुरी
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