अब बियाबान मेंं जी लगता है……..

यहां कोई न भला लगता है

अब बियाबान मेंं जी लगता है।

आ के शमशान में है ढ़ेर हुआ

वो उम्र भर का चला लगता है।

तुम भी ले आये क्या नकाब नई

आज चेहरा तो बदला लगता है।

आप ऐसे न छुआ कीजे मुझे

मेरे अंदर से कुछ चटकता है।

गरीबी जब से है जवान हुई

घर का दरवाजा बंद रहता है।

छोडिय़े, उसको कहां ढूंढेंगे

जो कहीं आस्मां में रहता है।

………सतीश कसेरा

Comments

4 responses to “अब बियाबान मेंं जी लगता है……..”

  1. Panna Avatar

    खाई कई ठोकरे जिंदगी में हमने
    अब जी भरा भरा सा लगता है

    1. satish Kasera Avatar
      satish Kasera

      Thanks Panna

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

  3. Satish Pandey

    वाह वाह, कितना सुंदर लिखा है आपने

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