दो दिल जुड़ते हैं जब सच्चाई से
चंचलता निरंतर जवान होती हैं
किसी से प्यार हो जाना
बेहद सुखद अनुभूति हैं
खुशनुमा अहसासों में
डूबकर कल्पनाएँ सोती हैं
आलिंगन किये रहते हैं
उमड़ते जज़्बात हर पल
ऐसा सच्चा प्रेम जहाँ
पूर्णतः भावनाएं निश्छल
दूर होकर भी ये वियोग
कभी नहीं अपनाते हैं
सच्चे प्रेमी विरह में भी
मिलन के ख्वाब सजाते हैं
ऐसा अटूट प्रेम जब कभी
दो आत्माओं को मिलाता है
जन्मो जन्मों तक के लिए
प्यार अमर हो जाता है
अमर प्रेम
Comments
8 responses to “अमर प्रेम”
-
Nice
-
Shukriya sir🙏🏼
-
-
इसे कहते हैं आधुनिक कविता।
छन्दमुक्त,
लयमुक्त, तुकान्तमुक्त सुन्दर रचना-
Thank you sir🙏🏼
-
वेलकम
-
-
-
सुन्दर
-
Thank you sir🙏🏼
-
-
अति सुंदर अभिव्यक्ति
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.