Anita Sharma's Posts

ख्वाइशें उसकी

ज़िन्दगी कभी अज़ीब सी भंवर उठाती है चहुँ और पानी तो नज़र आता है न जाने नाव क्यों न चल पाती है झकझोरती हैं ख्वाइशें दिल में दबी उसके पंख फड़फड़ाते तो है पर वो उड़ान नहीं भर पाती है बीज बोती है कामयाबी के परचम लहराने को पर ये क्या फसल हरी होते ही चिड़िया खेत चुग जाती है पहनती है सुहाग किसी और के नाम का कुत्सित रूढ़ियों बेड़ियों में तब वो जकड जाती है डरती भी है लड़ती भी कभी बहुत झल्लाती है अंत में खुद को ही सम... »

कविता

ज़िन्दगी अबूझ पहेली सी है कभी बहुत करीब एक सहेली सी कुछ उठते सवाल उलझे से नहीं मिलते जवाब सुलझे से बड़ी शिद्दत से अगर खोजें तो कुछ हल पाने में आसानी होगी ज़्यादा बुद्धिमत्ता समझने की इसको शायद बिलकुल बेमानी होगी चक्रव्यूह ये भेदना आसान नहीं अथक संयम भी बरतना होगा हर इम्तिहान का फल चखना होगा खुली आँखों से परखना भी होगा तभी परिपक्वता का विस्तार होगा तेरी शख्शियत में फिर निखार होगा ©अनीता शर्मा अभिव्यक़्... »

Shayari

मेरे अपनों से ही तो प्रेरित हैं मेरे शब्दों की गहराईयाँ वर्ना हर बात पर अक्सर हम बेज़ुबां हो जाते थे ©अनीता शर्मा अभिव्यक़्ति बस दिल से »

Shayari

आँखों की नमी देखकर हम, नज़रें उनसे चुराने लगे, वो फिर से कही रो ना दें, हम खुल कर मुस्कुराने लगे ©अनीता शर्मा अभिव्यक़्ति बस दिल से »

Shayari

ये राहें ले ही जाएंगी मंज़िलों तक हौसला रख कभी सुना है अँधेरे ने सवेरा होने ना दिया ©अनीता शर्मा अभिव्यक़्ति बस दिल से »

कविता

आपका ख़याल जब भी हमें आता है ज़िन्दगी के प्रति नजरिया ही बदल जाता है कमाल क़ि बात है,किश्तों में ही सही मेरे दिल की उलझनों को सुलझाता है आपका ख्याल साथ कुछ ऐसे निभाता है ये अकेलापन भी छिटक कर दूर जाता है आपका ख्याल महकते गुलाब सा ही तो है जिस्म से रूह तक को महका जाता है आपका ख्याल इस तरह दस्तक दे जाता है रूबरू हों जिससे,वो खूबसूरत नज़र आता है ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

Shayari

मैंने खुद लिखा अपनी किस्मत मैं दर्द इशारा तो मिला था कई बार ज़िन्दगी का संभल जाता अगर गौर करता ज़रा भी आज यूँ मारा मारा न फिरता दर बदर ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

Shayari

ज़मीन पर टिके हो कदम मंज़िल पर टिकी हो नज़र राहें खुद आसान हो जाएंगी लाख मुश्किलों से भरी हो डगर ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

कविता

सपना उज्जवल भविष्य का जितना ही बड़ा होगा कामयाबी का ताज रत्नों से उतना ही जड़ा होगा क्या हुआ अभी फर्श पर नज़र आते हैं हम कल अपने सम्मान में भी जनसैलाब उमड़ा होगा ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

Shayari

जिन्हें हम भूल जाते हैं फिर भी वो याद आते हैं बन कर रतजगे यादों के ज़हन में क्यों उतर जाते हैं ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

कविता

लौटना न मुसाफिर बस कदम तू बढ़ाना आयें जो भी मुश्किल खुल कर तू भिड़ जाना कोई ज़ोर नहीं चलता गर मज़बूत हों इरादे हारा वही है बस जो मुश्किलों से दूर भागे ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

Shayari

यूँ बनती बिगड़ती किस्मत की नुमाइश ना कर बन्दे तक़दीर सँवरती नहीं शिकायत के पुलिंदों से ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

Shayari

लिख दी है इबारत कामयाबी की मैंने तवज्जो मेहनत को देकर पहले अब इंतज़ार है अपनी किस्मत का कब दौर मेरा भी लाएगी ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

Shayari

दूरियां ज़बरदस्त कायम है दरमियाँ दो दिलों के कौन जाकर समझाए उन्हें किस्मत से मोहब्बत मिलती है दिलों में रंजिशें हो तो इश्क़ मुकम्मल हुआ नहीं करते ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

उड़ जा रे पंछी

उड़ जा रे पंछी ख़ुशी से उस असीमित गगन में क्या सोचता है बैठ कर फिर कैद की फिराक में जल्दी से छोड़ दे ये बसेरा कहीं और जाकर खोज ले यहाँ पिंजरे है तेरी ताक में आज तुझको समझा हूँ मैं जब खुद को कैद में पाया नहीं कुछ भाता है ऐसे में क्या धूप हो या हो छाया पंखों को फैलाकर अपने खूब लम्बी उड़ान भरना आँधी जो रोके राह तेरी पल भर को तू न डरना उड़ जा रे पंछी ख़ुशी से उस असीमित गगन में ©अनीता शर्मा अभिव्यक़्ति बस दिल... »

सीख मोमबत्ती की

जलते ही रोशनी फैलाती है, मोमबत्ती भी सीख दे जाती है, हम मानस पुतलों की तरह इक तालमेल बैठाती है व्यक्तित्व छोटा हो या बड़ा, महक भी चाहे हो जुदा, लेकिन कार्य पृथक नहीं इनका, दोनों का काम है जलना शायद किसी दौड़ में नहीं ये शामिल, ना चाह में,एक दूसरे को परखना क्यों किस्मत दोनों ने एक ही पायी नियति में लिखा इनके है जलना, बस इसी तरह तुमको हमको, एक सांचे में मिलकर ढलना! सोचो भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में कब जाने,... »

दगाबाज़

झूठे थे वादे सभी झूठे तेरे इरादे भी लफ्ज़ भी शर्मिंदा है तुझे बयाँ कैसे करें कुत्सित तेरी सोच थी कुटिल थी फितरत तेरी लफ्ज़ भी शर्मिंदा है तुझे बयाँ कैसे करें ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

अपनों में बेगाना

मैंने तुझे जितना समझाया तू क्यों उतना बिफरता गया तुझे राह सच की दिखाई जो तू क्यों फिर भी बिगड़ता गया तुझे सुलझाने की कोशिश की तू क्यों उतना उलझता ही गया क्या वजह है तेरी नाराज़गी की जो जुदा तू सबसे यूँ होता गया आ अपने दिल की बात कहले अब अपनों में ना रह यूँ गुमशुदा ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

ज़िन्दगी खूबसूरत है

ज़िन्दगी खूबसूरत है इसे खुल कर जियो छोड़कर द्वेष का भाव हँस कर सबसे मिलो किसी की कष्ट न दो मुस्कराहट की वजह बनो ज़िन्दगी खूबसूरत है इसे खुल कर जियो सही कहा गया है कर्म का फल कहाँ जाता है जो देगा तू वही पायेगा तेरा किया आगे आएगा ज़िन्दगी खूबसूरत है इसे खुल कर जियो ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

मतलबपरस्त

मतलबी ही रहे तुम ज़िन्दगी के हर पड़ाव में अब उम्र हो चली है ज़रा पश्चाताप कर लो माना तुम ज़िन्दगी भर करते रहे छलावा! पर याद रहे मिलता हर कर्म का हिसाब, वक़्त करता है ये दावा खूब मौज उड़ाई तुमने पहनकर अच्छाई का नकाब रिश्ते निभाए फायदों तक लेकिन जान गए हम कि, मतलब निकालने में नहीं तुम्हारा कोई जवाब ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

कविता

तुम्हे दूर जाना था, तो पास आये ही क्यों वादों से मुकर जाना था, तो सब्ज़ बाग़ दिखाए क्यूँ मेरी फितरत में नहीं शामिल बेवज़ह रिश्तों को तोड़ देना पर तुम खुदगर्ज़ निकले तो फिर हम रिश्ते निभाए क्यूँ ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

बंद खिड़की

तलबगार है ये बंद खिड़की उस शख्श के दीदार की जो वादा करके गया आने का अब हद्द हो चुकी इंतज़ार की गुज़रती हैं जब भी हवाएं यहाँ से दर्द की आहट उठ जाती है चरमराती कराहती हैं बहुत ये खिड़की बहुत चिल्लाती है जाम से चुके कब्जे इसके झुँझलाते किटकिटाते से उन यादों के झरोखों से तेरी कोई हूक सी उठ जाती है आजा की रंग फीके न हो जाएँ खुलने को आज भी बेताब ये खिड़की रोशनी भी गुज़रने नहीं देती कैसी ज़िद पर अड़ी है ये खिड़की... »

मनमोहिनी

मेरी कल्पना में कहीं जो बसी है वो मदमस्त थिरकती जो अपनी ही धुन में , फूलों सी महकती हर अदा में अभिव्यक्ति मोहपाश में बांधे वो कजरारी निगाहें , हाँ तुम वही मेरी प्रियवंदिनी हो , हाँ तुम वही मेरी मनमोहिनी हो क्या सुन्दर भंगिमाएं सभी तुम्हारी हर सुर ताल पर ऐसे बन रही हैं पुलकित मयूर नाच उठा हो कहीं जैसे प्रेम रस ऐसे बरसा रही हो हाँ तुम वही मेरी मनभावनी हो हाँ तुम वही मेरी मनमोहिनी हो वो ढ़ोल की हर थाप... »

मेरा लक्ष्य

किस्मत ने पलटकर कहा आगे भी बढ़ ज़रा मैं बहुत बुलंद हूँ मैंने कहा तू बुलंद है फिर भी पलट सकती है ज़रा सामने देख मेरा लक्ष्य है खड़ा अब तेरे लिए नहीं उसके लिए फिक्रमंद हूँ ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

वृद्धाश्रम

ओ माँ कितनो को तुझ पर कविताएं पढ़ते देखा है तेरी तारीफों में कितने कसीदे गढ़ते देखा है, कितनो को शब्दोँ से सिर्फ तुझपर प्यार लुटाते देखा है, कितना इस दुनिया को तेरी ममता का पाठ सुनाते देखा है, देखा है पर कुछ ऐसा भी जिसके लिए मिलते शब्द नहीं, मायूसी सी छा जाती है दिल में जग जाते दर्द कहीं, तू जिसके लिए सब कुछ थी कल तो, क्यों फिर अब तेरा कोई वजूद नहीं, कितनी कद्र है तेरी, तेरा ही भविष्य तुझे बताता है,... »

Shayari

बादशाहत दिखाते रहे आग पर आग लगाते रहे इक्कों के मायाजाल में फँसे बाजियों में गड्डियॉं फटकाते न जाने कितनी कीमत चुकाते गए ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

सुप्रभात

फिर हुआ नई सुबह का आगाज़ है नया दिन नयी उम्मीदों का राज है चहचहाते पंछियों की गूंजती आवाज़ है सरसराती सुबह की ठंडी बयार है उस पर पड़ती सावन की फुहार है हर तरफ सुहावने मौसम का राज़ है ये चमकती किरणे पुकारती हैं सबको जागो उठो खुल कर मुस्कुराओ स्वागत करो दोनों बाहें फैलाकर तुम्हारे सामने खड़ा तुम्हारा आज है सुप्रभात ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

ए आलस

ए आलस तू भाग जा यूँ जिन्न की तरह मुझपर ना कब्ज़ा जमा बहुत कुछ ज़िन्दगी में है करने को अभी बाकी तू मेरी कल्पनाओं पर ना यूँ लगाम लगा मंसूबे तेरे मैं पहचान गयी हूँ इसलिए तुझको मैं त्याग चुकी हूँ अब तू इस तरह से ना घेरा लगा बस बहुत हो चुका चल तू भाग जा ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

कितनी दूर

कितनी दूर चलना है इसकी फ़िक्र कौन करता है बस मंज़िलें सही मिल जाएँ ज़माना भी ज़िक्र उसकी करता है जो लक्ष्य भेदकर अपना सफलता के परचम लहराता है वो कहाँ खटकता है फिर किसी को ऊँचा उठ जाता है नज़रों में लाख नाकारा कहा हो लोगों ने आखिर फिर कामयाब कहलाता है ©अनीता शर्मा »

अलविदा

घनी काली चाँदनी रात जैसे हो रही तारों की बरसात महकाती गुज़रती ये ठंडी हवा, नींद के आगोश में है सारा जहाँ, ये रात क्या कह रही है, क्या किसी ने उस नज़्म को सुना, शायद कह रही है वो अलविदा »

बढ़ता चल

सफर बहुत लम्बा तूफानों से घिरा था इरादा मेरा लेकिन पक्का बड़ा था बड़ी मज़बूती से पकड़ी थी जो पतवार अपनी मेरा ज़ज़्बा मेरी मुश्किलों के आगे जो खड़ा था लौटना न मुसाफिर बस कदम तू बढ़ाना आयें जो भी मुश्किल खुल कर तू भिड़ जाना कोई ज़ोर नहीं चलता गर मज़बूत हों इरादे हारा वही है बस जो मुश्किलों से दूर भागे ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

कभी तो बेवजह मुस्कुराओ

खुशियों को आने का मौका दो कभी तो बेवजह मुस्कुराओ यक़ीनन बहारें लौट आएँगी तुम ज़रा धीमे से खिलखिलाओ ढलती उम्र सी हर पल ये ज़िन्दगी ज़र्रा ज़र्रा हाथ से फिसलती है ज़िन्दगी सोचते क्यों हो मुस्कान के लिए ये तो सुकून देगी यूँ विराम ना लगाओ खुशियों को आने का मौका तो दो बस कभी बेवजह ही मुस्कुराओ मत चूकना किसी के होठों पर मुस्कान देने को ज़िद छोड़कर अहम् तोड़कर सबको गले लगाओ वक़्त ठहरता नहीं किसी के लिए तुम खुशनसीब... »

शुभचिँतक- कविता

वो सब्र का पाठ तो पढ़ाते थे बेसब्र ना हो,सब ठीक होगा ! फिर इम्तिहानों के दलदल में खुद बेसब्र हो,अकेला छोड़ जाते थे! हालातों से लड़ते हम वहीँ के वहीँ रह जाते थे! वो आकर अक्सर,हमको ढाँढस बंधाते थे दर्द को सहन करो सब ठीक ही होगा ! फिर वैसे ही ज़ख्मों को कुरेदकर नमक छिड़कते चले जाते थे ज़ुल्म सहन करते हम वहीँ के वहीँ रह जाते थे! वो आते,आकर बड़ी हिम्मत दे जाते थे, मज़बूती से आगे बढ़ो सब ठीक होगा! और फिर उन हाला... »

Shayari

खौफ खातीं है सर्द मौसम की हवाएं भी मुझसे सीने में दहकते सूरज सी जिंदादिली रखती हूँ हौसला परवान पर है उम्र हारी है ढलती उम्र है तो क्या जज़्बा ज़िन्दगी जीने का, खुद के दम पर रखती हूँ ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

ज़िन्दगी की किताब

गहनता से लिख रही हूँ मैं लफ्ज़ कम लगते हैं गर लिखने बैठो ज़िन्दगी की किताब चंद लम्हे फुर्सत मिली बाकी रहा ज़िम्मेदारियों का दबाव यादों को तक सँजो ना सके रखते रहे पल पल का हिसाब बड़ा कठिन है ज़िन्दगी में उसूलों पर चलना वक़्त के साथ सलीके में रहना कभी तो बड़ा दर्द देता है भावनाओं का बिखरना बैचैन किये रहता है इनका सुख दुःख में बँट जाना उलझने फँसाती जातीं हैं बेहिसाब अंदाज ए ज़िन्दगी बड़ा लाजवाब काश कभी कोई इत... »

Shayari

कितनी रातें गुज़र जाती हैं नींद आये तो भी आंखें सोती नहीं ज़हन में ख्याल तेरा नज़र में इंतज़ार पलकें भीगती हैं पर आँख रोती नहीं ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

Shayari

शुक्रगुज़ार तेरे नहीं तेरी तस्वीर के हैं तन्हाइयों में भी हमारे साथ होती है छोड़ती नहीं एक पल हमारा साथ साथ जगती भी है और साथ सोती है ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

Shayari

दिलकश महबूब से इश्क़ बेहद खूबसूरत एहसास देता है कहीं नाकाम आशिक़ बना देता है कहीं सरताज बना लेता है ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

स्वप्न या भ्रम – कविता

हर रोज़ पहुँच जाती हूँ उस श्वेत निर्मल घरोंदे में न जाने किस जन्म की कहानी शायद कैद है उन दीवारों में जहाँ पहुँच कर अतीत के पन्ने करवटों की तरह बदलते है शीतल पवन निर्मल सी बहती है पुकारती हो जैसे मेरी पहचान को वो बयार कुछ फुसफुसाती है जैसे अतरंगता मेरे प्रेम की बयान करके चली जाती हैं कोई याद मेरे पूर्वजन्म की सिमटी है उन गलियारों में क्या कोई रूहानी ताकत मुझको बार बार बुलाती है क्या अतीत था मुझसे ज... »

ना…री – कविता

ना…री तू बिलखना नहीं किसी सहारे को अब तरसना नहीं तू स्वयंसिद्ध और बलवान है नहीं महत्वहीन तू खुद सबकी पहचान है सशक्त है तू नाहक ही छवि तेरी कमज़ोर है पर तेरे जोश का हर कोई सानी है सबल ममतामयी गुण तुझमें चेहरा अद्भुत जैसे माँ शक्ति भवानी है आदिकाल से तू है इतिहास रचयिता हर जीत में भी सहभागी है परचम लहराए हैं तूने भी अनमोल बड़ी तू अति प्रभावशाली है तेरी क्षमता का जिनको ज्ञान नहीं वो भी इक दिन नतम... »

विजयी भव

मुश्किलें किसके जीवन में नहीं आतीं ये दृढ़ता से समझना होगा खुद की कोशिश नाकाम नहीं होतीं विजय पथ पर खुद अग्रसर होना होगा जब कोई अपने हिसाब से लड़ता जाता है कुछ बेख़ौफ़ बढ़ते रहते हैं कुछ थक हार मान लेते हैं कुछ सहारों की तलाश करते हैं कुछ टूट कर बिखर जाते हैं मुश्किलों का अफ़सोस न करना ये तो ज़िन्दगी का अबूझ हिस्सा है अगर मगर में क्या बंधक होना हर सफलता से जुड़ा एक कठिन किस्सा है आसमाँ की लगन गर लगी है तो... »

कुछ अनकही – कविता

वो प्रीत के मनोरम स्वर्णिम पल दफ़न क्यों हुए चारदीवारी में, वो जुड़ रही थी या टूट रही थी जलते से या बुझते अरमानों में, वो प्रेम या वेदना के पल कहूं या तार तार हुआ सपनो का महल कौन देगा उस दुःख को गठरी का हिसाब जो करुण क्रंदन करती ये चौखट बेहिसाब गवाह तो सब है गुजरती है वो किस पीड़ा से ये चरमराते द्वार ये खटखटाती खिड़कियाँ ये सीलन मैं उखड़ती दरो दीवार क्या उकेरूँ शब्दों मैं उसकी छुपी दास्ताँ को कैसे लिखू... »

Shayari

मुकम्मल कभी वो प्यार नहीं जो तवज्जो रंगे नूर से मिले जो सीरत से दिल लगाए वो मुहब्बत कमाल होती है @अनीता »

Shayari

माथे पर शिकन से उभरती लकीरों को देखकर एक फ़कीर ने कहा तूने बुलंद किस्मत है पायी उसे क्या पता था कि एक जान के बदले में गिरवी रख आया हूँ अपनी सारी कमाई ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

Shayari

शतरंज में अक्सर बाज़ियाँ पलट जाती हैं अक्लमंदी से मोहरे चलना ए बाज़ीगर किस्मत बुलंद हैं गर अदने से मोहरे की तो राजा के हिस्से में शह और मात आती है ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

Shayari

दूरियां ज़बरदस्त कायम है दरमियाँ दो दिलों के कौन जाकर समझाए उन्हें किस्मत से मोहब्बत मिलती है दिलों में रंजिशें हो तो इश्क़ मुकम्मल हुआ नहीं करते ©अनीता शर्मा अभिव्यक्ति बस दिल से »

डर

डर का वजूद कुछ नहीं ये स्वयं जनित मनोभाव है आसन्न खतरे की चिंता से उत्पन्न भय निराशावाद है एक अंतहीन भ्रम की स्थिति हक़ीक़त के धरातल पर भय का ना कोई ओर छोर है किसी कार्य के क्रियान्वन से पहले उद्विग्न मन में उठा ये शोर है अरे! मुझे डर लग रहा है डर का दबदबा कायम है हमारे मन मस्तिष्क में, बड़े शातिर अंदाज़ हैं इस डर के हावी रहता है कल्पनाओं पर मिल जाता है जाकर अतीत में रोकने को तैयार जैसे जीत के मंज़र का... »

अमर प्रेम

दो दिल जुड़ते हैं जब सच्चाई से चंचलता निरंतर जवान होती हैं किसी से प्यार हो जाना बेहद सुखद अनुभूति हैं खुशनुमा अहसासों में डूबकर कल्पनाएँ सोती हैं आलिंगन किये रहते हैं उमड़ते जज़्बात हर पल ऐसा सच्चा प्रेम जहाँ पूर्णतः भावनाएं निश्छल दूर होकर भी ये वियोग कभी नहीं अपनाते हैं सच्चे प्रेमी विरह में भी मिलन के ख्वाब सजाते हैं ऐसा अटूट प्रेम जब कभी दो आत्माओं को मिलाता है जन्मो जन्मों तक के लिए प्यार अमर ह... »

Muktak

देखी दुनिया सारी फिर भी रहे अनाड़ी कर कुछ भी न पाए वो बनते रहे खिलाडी »

सवाल ज़िन्दगी से

हज़ारों सवालों से भरी ये ज़िन्दगी कभी खुद के वजूद पर सवाल उठाती कभीचलती भी,कभी दौड़ती भी है ये थक कर कभी चूर चूर हो जाती हर दिन नए हौसलों को संग लेकर शाम ढलते जैसे उम्मीदें तोड़ जाती कभी मज़बूरियों का वास्ता देकर ये अपने होने का सही मकसद भूल जाती सुकून की खोज में भटकती फिरती ये क्यों खुद में हर सुख ये नहीं तलाशती मोह है न जाने किस चीज़ का इसको शायद ज़िन्दगी खुद ही न समझ पाती क्यों कल की चिंता में आज को ब... »

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