अमावस को चमकते हैं

न करना इस तरह
संदेह हम पर आप यूँ
हम तो सितारे हैं
अमावस को चमकते हैं।
निगाहों पर निगाहें डालकर
दिल में धमकते हैं,
आपके मुस्कुराते होंठ में
हम ही चमकते हैं।

Comments

5 responses to “अमावस को चमकते हैं”

  1. बहुत ही लाजवाब सर

  2. Geeta kumari

    कवि सतीश जी की, उपमा अलंकार से सुसज्जित बहुत ही सुन्दर कविता.

  3. वाह वाह, बहुत खूब

  4. बहुत बढ़िया कविता

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