हलाहल मिला था तो,
अमृत भी मिलेगा
समुंद्र मंथन में,
सब कुछ मिलेगा l
घबराना नहीं है,
हिम्मत है रखनी
हमें ज़िन्दगी की जंग जीतनी है l
जब बढ़ जाएं बुरी शक्तियाँ ज्यादा,
हमें मिल-जुल कर इनको हराना हैl
डरना नहीं है किसी कीमत पर इनसे,
अपने मनोबल से इनको डराना है ॥
______✍गीता
अमृत
Comments
6 responses to “अमृत”
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इस समय के लिए अतिउपयुक्त रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद
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यथार्थ प्रस्तुति
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बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी🙏
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प्रेरणा।
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आभार सर
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